BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 23 जनवरी, 2008 को 04:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक शुरू
दावोस
बैठक में मुख्य रूप से पर्यावरण और आतंकवाद पर चर्चा होनी थी
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक बुधवार से स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में शुरु हो रही है और संकेत मिल रहे हैं कि दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में आई गिरावट का मुद्दा इस बैठक में भी छाया रहेगा.

विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक पिछले कई दशकों से विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को एक अनोखा मंच देती आई है, जिससे साल के शुरु में विश्व एजेंडा का स्वरूप तैयार किया जा सके.

इस बार दो प्रमुख विषयों पर चर्चा होनी तय थी. पर्यावरण परिवर्तन और आतंकवाद. लेकिन इस सप्ताह दुनिया के शेयर बाज़ारों में आई भारी गिरावट पर चर्चा से इस बैठक की शुरुआत हो सकती है.

इसके अलावा अमरीकी अर्थव्यवस्था पर डगमगाता विश्वास और आर्थिक और वित्तीय अस्थिरता को लेकर उठी चिन्ता इस बैठक पर छाई रहेगी.

इसमें भाग लेने आए सदस्य मिलकर इस बात पर विचार करेंगे कि विकास की राह में कौन-कौन सी चुनौतियां हैं और उसके बाद कार्य योजना तैयार की जाएंगी.

दावोस में विश्व की आर्थिक अनिश्चितता पर विचार होगा. बहस के पहले ही सत्र में यह सवाल उठाया जाएगा कि जब अमरीका छींकता है तो पूरी दुनिया को ज़ुकाम क्यों हो जाता है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डॉ. हुसैन हक्कानी कहते हैं, "अभी दावोस में जो माहौल है उसमें लोग सोचना शुरू कर चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय जगत की अर्थव्यवस्था पिछले बरसों में अच्छी चलती रही है, वो आगे कुछ मंदी पड़ सकती है और ऐसा होने पर क्या परिणाम सामने आ सकते हैं और उससे कैसे निपटा जाएगा."

बैठक में वित्तीय मामले कम ही सुर्खी़ में रहते हैं लेकिन इस बार दुनिया की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य पर बहस होगी और भाग ले रहे नेताओं को हल भी खोजने होंगे.

पानी और आतंकवाद

विश्व आर्थिक मंच की बैठक में पर्यावरण परिवर्तन पर भी चर्चा होनी है और पानी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाना है. दुनिया के कई हिस्सों में पानी की भारी कमी हो रही है.

डॉ. आरके पचौरी, अध्यक्ष-आईपीसीसी
 दावोस में मुख्य रूप से तो नेटवर्किंग होती है. किसी मुद्दे पर काम कम ही होता है पर इस बहाने मुद्दे चर्चा में आते हैं. मुझे लगता है कि दुनिया की सारी समस्याओं को लेकर बैठे तो 4-5 दिन की बैठक से कुछ नहीं निकल पाएगा. ज़्यादा फ़ोकस होने की ज़रूरत है

जैसे-जैसे विश्व अर्थव्यवस्था का विकास हो रहा है, जल संसाधनों पर बोझ बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं.

पानी के सीमित संसाधनों के उपयोग में सहयोग करना आसान काम नहीं है. इसलिए सरकारों, व्यापार जगत और समुदायों को मिलकर ही कोई हल खोजना होगा.

संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमैंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेन्ज के अध्यक्ष डॉ आरके पचौरी कहते हैं, "दावोस में मुख्य रूप से तो नेटवर्किंग होती है. किसी मुद्दे पर काम कम ही होता है पर इस बहाने मुद्दे चर्चा में आते हैं. मुझे लगता है कि दुनिया की सारी समस्याओं को लेकर बैठे तो 4-5 दिन की बैठक से कुछ नहीं निकल पाएगा. ज़्यादा फ़ोकस होने की ज़रूरत है."

दूसरी प्रमुख चुनौती है आतंकवाद. दो दिन पहले ही विश्व आर्थिक मंच ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. यह अपने क़िस्म की पहली रिपोर्ट है जो यह बताती है कि मुस्लिम और पश्चिमी समाज, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्तर पर एक दूसरे को कैसे देखते हैं.

यह रिपोर्ट दुनिया के कुछ प्रमुख विद्वानों और विशेषज्ञों ने तैयार की है. इसके अनुसार दुनिया की अधिकांश आबादी यह मानती है कि पश्चिमी और मुस्लिम जगत के संबंधो की वर्तमान स्थिति निराशाजनक हैं लेकिन दोनों के बीच हिंसात्मक संघर्ष को रोका जा सकता है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>