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पेरिस की बस्तियों में हिंसा जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस की राजधानी पेरिस के बाहरी इलाक़ों में युवकों की पुलिस के साथ झड़पें बंद नहीं हुई हैं और बीती रात इन झड़पों में कम से कम 60 पुलिस अधिकारी घायल हो गए जिनमें से पाँच पुलिस अधिकारियों की हालत गंभीर बताई गई है. ये झगड़े तब शुरू हुए जब गत रविवार को पुलिस की एक कार के साथ हुई दुर्घटना में मोटरसाइकिल पर जा रहे दो युवकों की मौत हो गई. उसके बाद पेरिस के उत्तरी छोर पर स्थित विलियर्स ली बेल नामक बस्ती दंगे भड़क उठे और युवक पुलिस के साथ भी भिड़ गए. जिन दो युवकों की उस दुर्घटना में मौत हुई वे उत्तर अफ्रीकी मूल के थे. इसी तरह के दंगे 2005 में भी कुछ ऐसी बस्तियों में हुए थे जिनके बारे में कहा जाता है कि वहाँ विकास की गति कुछ धीमी है और बुनियादी सुविधाएँ नहीं होने के साथ-साथ बेरोज़गारी भी काफ़ी है. फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने शांति बनाए रखने की अपील की है. फिलहाल वह चीन की यात्रा पर हैं. पेरिस में बीबीसी संवाददाता एलेस्टर सैंटफ़र्ड का कहना है कि बीती रात हिंसा उससे पिछली रात के मुक़ाबले ज़्यादा भीषण थी. युवकों के कई गुटों ने पुलिस पर पैट्रोल बमों और पत्थरों से हमला किया. पुलिस का कहना है कि युवकों ने हथियारों का भी इस्तेमाल किया जिनकी वजह से अनेक पुलिस अधिकारी ज़ख़्मी हो गए. पुलिस के अनुसार उन्होंने युवकों पर आँसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियाँ भी चलाईं. यह हिंसा पेरिस के उत्तरी हिस्से में पाँच गाँवों में फैल गई है. कई कारों को जला दिया गया और दो स्कूल, एक लाइब्रेरी और कुछ दुकानों को भी नुक़सान पहुँचाया गया. फ्रांस के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री मिशेल एलियट मैरी ने कहा है कि उनका ख़याल है कि ये दंगे संगठित रूप से हुए हैं. पुलिस जाँच के शुरूआती नतीजों में कहा गया है कि कार दुर्घटना में जिन दो युवकों की मौत हुई थी उसके लिए पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि युवकों की तेज़ रफ़्तार से चल रही मोटरसाइकिल ने ख़ुद ही पुलिस की एक गश्ती कार को टक्कर मारी थी. इस दुर्घटना की जाँच के आदेश दिए गए हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस घटना की वजह से उन युवकों का ग़ुस्सा बाहर आ गया है जो पेरिस के बाहर की बस्तियों में रहते हैं जो काफ़ी ग़रीब हैं. यह भी कहा जाता है कि उन बस्तियों में लोगों के साथ पुलिस का भेदभाव और उत्पीड़न का बर्ताव एक आम बात है. उत्तरी पेरिस इलाक़े की बस्तियों में ज़्यादातर अफ्रीकी मूल के लोग रहते हैं. रविवार को भड़की हिंसा में लगभग तीस कारों और कुछ इमारतों को आग लगा दी गई थी जिनमें एक पुलिस स्टेशन भी था. इस हिंसा में अब तक 26 पुलिस और अग्निशमन के अधिकारी ज़ख़्मी हो चुके हैं. नौ लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें सार्कोज़ी को आरामतलबी पसंद नहीं16 मई, 2007 | पहला पन्ना शिराक ने सार्कोज़ी को सत्ता सौंपी16 मई, 2007 | पहला पन्ना रेल की रफ़्तार का नया रिकॉर्ड03 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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