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बुधवार, 16 मई, 2007 को 11:26 GMT तक के समाचार
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सार्कोज़ी को आरामतलबी पसंद नहीं
निकोला सार्कोज़ी
निकोला सार्कोज़ी को मध्य-दक्षिणपंथी विचारधारा का नेता कहा जाता है
फ्रांस के नए राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ख़ुद को आधुनिकतावादी विचारों वाला नेता मानते हैं और उनकी पृष्ठभूमि देश के परंपरागत शासक तबके से अलग है.

छह मई को हुए चुनाव में देश की सोशलिस्ट पार्टी के साथ उनका कड़ा मुक़ाबला हुआ था और सोशलिस्ट उम्मीदवार सेगोलीन रोयाल से भी उनकी कड़ी टक्कर हुई.

निकोला सार्कोज़ी को धुर दक्षिणपंथी तो नहीं लेकिन मध्यमार्गी-दक्षिणपंथी विचारधारा वाला नेता माना जाता है.

उन्होंने आव्रजन के मुद्दे पर कड़ा रुख़ अपनाकर फ्रांस में एक नई बहस छेड़ी. 2005 में हुए दंगों के दौरान पेरिस के बाहरी इलाक़ों में रहने वाले युवाओं को उन्होंने बिगड़ैल की संज्ञा दी थी जिस पर काफ़ी विवाद भी हुआ था.

निकोला सार्कोज़ी के इस कड़े बयान की वजह से उनके कुछ आलोचकों ने उन्हें धुर दक्षिणपंथी नेता ज्याँ मेरी ला पेन की श्रेणी में रखने की बात की थी.

आंतरिक मामलों के मंत्री रहे 52 वर्षीय निकोला सार्कोज़ी ने देश में अवैध रूप से आने वाले लोगों पर पाबंदी लगाने के लिए कड़े उपायों की हिमायत की थी और उनमें अवैध रूप से देश में रहने वाले लोगों को देश से निकालने जैसे उपाय भी शामिल थे.

हालाँकि निकोला सार्कोज़ी का यह भी कहना था कि हुनर वाले लोगों को फ्रांसीसी समाज में घुलने-मिलने के लिए क़दम उठाए जाएँ.

निकोला सार्कोज़ी ने यह भी प्रस्ताव रखा था कि देश में युवाओं में बेरोज़गारी कम करने के लिए सकारात्मक भेदभाव यानी आरक्षण हो यानी बेरोज़गारों को मदद दी जाए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

निकोला सार्कोज़ी का कार्टून

यह दलील उन लोगों के लिए एक चुनौती थी जो समानता के फ्रांसीसी सिद्धांत की हिमायत करते रहे हैं.

इतना ही नहीं, निकोला सार्कोज़ी ने मुसलमानों को मस्जिदें बनाने के लिए सरकारी मदद देने का भी आहवान किया था और उनके इस प्रस्ताव ने ख़ासा विवाद खड़ा कर दिया था.

संवाददाताओं का कहना है कि एक बड़ा सवाल अब ये है कि क्या निकोला सार्कोज़ी वो भूमिका निभाने के लिए ख़ुद को कुछ बदल पाएंगे जो फ्रांस का राष्ट्रपति परंपरागत रूप से विश्व राजनीति में निभाता रहा है यानी देशों के बीच सुलह-सफ़ाई की.

फ्रांस का शासक तबका आमतौर पर प्रशासनिक पृष्ठभूमि से रहा है लेकिन निकोला सार्कोज़ी उस तबके से नहीं हैं मगर उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की है.

ब्रिटेन का प्रभाव

निकोला सार्कोज़ी की जीवनी लिखने वाले निकोलास डोमिनाक के अनुसार नए राष्ट्रपति काफ़ी हद तक ब्रितानी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित हैं न कि फ्रांसीसी राजनीति से, "निकोला सार्कोज़ी अनेक कारणों के लिए ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की प्रशंसा करते हैं."

"टोनी ब्लेयर मीडिया को प्रभावित करने में कामयाब रहे और सार्कोज़ी ने भी ऐसा ही किया और सार्कोज़ी की नज़र इस बात पर भी रहती है कि टोनी ब्लेयर किस तरह से अपनी राजनीतिक विचारधारा को फैलाने में कामयाब रहे."

ज़मीन से उठकर

निकोला सार्कोज़ी 1983 से 2002 तक पेरिस के एक बाहरी इलाक़े न्यूइली के मेयर रहे थे और फिर देश के आंतरिक मामलों के मंत्री बने. वह 2004 में कुछ समय के लिए देश के वित्त मंत्री भी रहे.

फ्रेंच प्रसारण संगठन एलसीआई में राजनीतिक संपादक और निकोला सार्कोज़ी की जीवनी लिखने वाली अनीता हाउसर का कहना है, "वह बहुत सक्रिय रहने वाले और महत्वकांक्षी नेता हैं, बहुत काम-काज करते हैं और काम करने का उन्हें नशा लगा हुआ है और उन्हें आरामतलबी की आदत नहीं हैं."

ज़्याक शिराक
ज़्याक शिराक किसी ज़माने में निकोला सार्कोज़ी के राजनीतिक गुरू थे

अनीता हाउसर कहती हैं कि निकोला सार्कोज़ी की अपील बहुत सीधी नज़र आती है कि वह एक वकील रहे हैं इसलिए आम लोगों के ज़्यादा नज़दीक हैं. वह लोगों को दिखाना चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को अच्छी तरह से समझते हैं और वह उन्हें हल करने की योग्यता और क्षमता भी रखते हैं.

पेरिस में बीबीसी संवाददाता कैरोलीन व्याट का कहना है कि ऐसा लगता है कि निकोला सार्कोज़ी ने कोई नई विचारधारा नहीं अपनाकर यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया है जिसमें वह किसी भी समस्या का समाधान निकालने के लिए वो तरीका अपनाएंगे जिसमें कामयाबी मिले.

ज़्याक शिराक किसी ज़माने में निकोला सार्कोज़ी राजनीतिक गुरू थे लेकिन दोनों के बीच उस समय अदावत हो गई जब सार्कोज़ी ने 1995 के चुनाव में शिराक के प्रतिद्वंद्वी का साथ दिया. शिराक की नज़र में वह एक ऐसा धोखा था जिसे वे कभी नहीं भूल पाए.

निकोला सार्कोज़ी ने भी शिराक़ की ही तरह इराक़ युद्ध का विरोध किया था. वह पुराने फ्रांस-जर्मनी गठबंधन के बहुत ज़्यादा हिमायती नहीं हैं लेकिन उन्होंने यूरोपीय संघ के नए सदस्य देशों को यह कहकर नाराज़ कर दिया कि जो देश पुराने यूरोपीय सदस्य देशों के मुक़ाबले कम कर अदा करते हैं उन्हें यूरोपीय सब्सिडी नहीं मिलनी चाहिए.

निकोला सार्कोज़ी ने तुर्की को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाए जाने की कोशिशों का भी विरोध किया है. दो बार शादी कर चुके निकोला सार्कोज़ी के तीन बच्चे हैं.

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