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'तस्करी में शामिल थे पाक शांतिरक्षक' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी को संयुक्त राष्ट्र की एक आंतरिक जाँच रिपोर्ट मिली है जो कांगो में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों पर सोने की तस्करी में लिप्त होने के कथित आरोप से संबंधित है. इस रिपोर्ट को देखने पर पता चलता है कि पाकिस्तान के कुछ शांतिरक्षक कांगो में सोने की तस्करी में लिप्त थे. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कुछ शांतिरक्षकों ने कांगो में अपनी तैनाती के दौरान सोने की तस्करी में लिप्त लोगों की मदद की. संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल ने पाया है कि पाकिस्तानी सैनिकों ने तस्करों को खाना, रिहाइश और सुरक्षित रूप से आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराई थी. इसी वर्ष मई महीने में बीबीसी को कुछ ऐसे सबूत मिले थे जिनसे यह साबित होता था कि अफ्रीकी देश कांगो में संयुक्त राष्ट्र के पाकिस्तानी शांतिरक्षक सोने की तस्करी में लिप्त थे. ग़ौरतलब है कि कांगो में वर्ष 2005-06 के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से नियुक्त पाकिस्तानी शांतिरक्षकों में से कुछ पर आरोप था कि वे अपनी नियुक्ति के दौरान सोने और हथियारों की तस्करी में लिप्त थे. कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि जाँच में सामने आए तथ्यों से पाकिस्तानी सरकार को अवगत करा दिया जाए ताकि पाकिस्तानी सरकार इन शांति रक्षकों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई कर सके. ग़ौरतलब है कि जिन शांतिरक्षकों पर ये आरोप लग रहे हैं, वे अब अपने देश यानी पाकिस्तान वापस लौट चुके हैं. वर्ष 2005 में संयुक्त राष्ट्र ने कुछ पाकिस्तानी शांति रक्षकों को इसलिए कांगो भेजा था ताकि वहाँ अवैध तरीके से हो रही सोने की तस्करी को रोका जा सके और कांगो के हालात बदलें. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय शांतिरक्षक भी जाँच के दायरे में14 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना पाक शांतिरक्षकों ने तस्करी कीः संयुक्त राष्ट्र13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना पाकिस्तानी शांतिरक्षकों ने की तस्करी23 मई, 2007 | पहला पन्ना कॉंगो में यूरेनियम तस्करी की जाँच08 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'गुड़-चने के बदले सोना नहीं'17 मई, 2006 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र ने नियम सख़्त किए19 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना 'मिसाइल तस्करों' पर आरोप13 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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