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भारतीय शांतिरक्षक भी जाँच के दायरे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों की हैसियत से तैनात भारतीय शांतिरक्षकों पर भी अब कथित रूप से सोने की तस्करी में लिप्त होने का आरोप लगाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र कांगो में अपने शांतिरक्षकों पर लग रहे तस्करी के कथित आरोपों को लेकर चिंतित है और इस पूरे मामले की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से एक जाँच दल कांगो भेजा जा रहा है. इस बारे में जानकारी देते हुए संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बताया कि जाँच में मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि क्या भारतीय शांतिरक्षक भी सोने की तस्करी में लिप्त थे या नहीं. ग़ौरतलब है कि भारतीय शांतिरक्षकों पर जाँच का फैसला ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र अपनी एक अंतरिम जाँच के बाद यह स्वीकार चुका है कि उनकी ओर से कांगो में नियुक्त कुछ पाकिस्तानी शांतिरक्षक सोने की तस्करी में लिप्त थे. इस बारे में शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की ओर से कहा गया था कि उन्हें कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे साबित होता है कि कुछ पाकिस्तानी शांतिरक्षक सोने की तस्करी में लिप्त थे. हालांकि सयुक्त राष्ट्र की अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे सबूत तो मिले हैं जिनसे यह साबित होता है कि कुछ शांतिरक्षक सोने की तस्करी में शामिल थे पर हथियारों की तस्करी में भी लिप्त होने का सबूत नहीं मिला है. शांतिरक्षकों पर संदेह इससे पहले इसी वर्ष मई महीने में बीबीसी को कुछ ऐसे सबूत मिले थे जिनसे यह साबित होता था कि अफ्रीकी देश कांगो में संयुक्त राष्ट्र के पाकिस्तानी शांतिरक्षक सोने की तस्करी में लिप्त थे. ग़ौरतलब है कि कांगो में वर्ष 2005-06 के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से नियुक्त पाकिस्तानी शांतिरक्षकों में से कुछ पर आरोप था कि वे अपनी नियुक्ति के दौरान सोने और हथियारों की तस्करी में लिप्त थे. वर्ष 2005 में संयुक्त राष्ट्र ने कुछ पाकिस्तानी शांति रक्षकों को इसलिए कांगो भेजा था ताकि वहाँ अवैध तरीके से हो रही सोने की तस्करी को रोका जा सके और कांगो के हालात बदलें पर ऐसा कर दिखाने के बजाए शांति रक्षक खुद ही इस तस्करी में लिप्त हो गए. संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों पर इस तरह के आरोप वर्ष 2005 में ही सामने आ गए थे पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस दिशा में तत्काल कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई. शांतिरक्षकों के इस तस्करी में लिप्त होने की ख़बर धीरे-धीरे चारों तरफ फैलने लगी जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2006 की शुरुआत में एक आंतरिक जांच के आदेश भी दे दिए थे. इस जाँच की शुरुआत के बाद कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे. मसलन, पाकिस्तान के कुछ शांतिरक्षक कांगो में अपनी नियुक्ति के दौरान सोने की तस्करी में लिप्त थे और सोना हासिल करने के लिए इन्होंने चरमपंथी संगठनों को हथियार तक दिए. | इससे जुड़ी ख़बरें पाक शांतिरक्षकों ने तस्करी कीः संयुक्त राष्ट्र13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना पाकिस्तानी शांतिरक्षकों ने की तस्करी23 मई, 2007 | पहला पन्ना कॉंगो में यूरेनियम तस्करी की जाँच08 मार्च, 2007 | पहला पन्ना 'गुड़-चने के बदले सोना नहीं'17 मई, 2006 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र ने नियम सख़्त किए19 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना 'मिसाइल तस्करों' पर आरोप13 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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