|
संक्रामक है मोटापा भी... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक शोध के मुताबिक़ अगर आपके दोस्त, भाई-बहन, रिश्तेदार या पति-पत्नी में से कोई मोटा है तो इस बात की काफ़ी संभावना है कि आप भी इसकी चपेट में आ जाएँ. अमरीका में 12 हज़ार लोगों पर किए गए शोध के मुताबिक़ दोस्तों के मोटे होने पर मोटापे की चपेट में आने का ख़तरा 57 फ़ीसदी बढ़ जाता है. जबकि रिश्तेदारों के मामले में 40 और पति-पत्नी में से किसी के मोटे होने की सूरत में दूसरे के मोटे होने का ख़तरा 37 फ़ीसदी होता है. हालांकि विशेषज्ञों ने ‘न्यू जर्नल आफ मेडिसिन’ के इस शोध को बिल्कुल सटीक न मानते हुए कई और छिपे कारकों को मोटापे के लिए ज़िम्मेदार माना है. शोध इन शोधों के लिए हावर्ड मेडिकल स्कूल और सैनडियागो स्थित कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के जमा किए गए 32 सालों के हृदय संबंधी आँकडों का सहारा लिया गया. इन आँकड़ो में लोगों ने अपने शारीरिक भार सूचकांक (बीएमआई) सहित कई व्यक्तिगत जानकारियाँ देते हुए अपने दोस्तों का नाम-पता भी दिया, जिनसे और जानकारी के लिए संपर्क किया जा सके. शोधकर्ताओं ने पाया कि दोस्तों और परिवारजनों के बीच आंतरिक सामाजिक संबंध महत्वपूर्ण हैं लेकिन ख़ासकर एक ही लिंग के लोगों में यह असर ज़्यादा देखा गया है. विश्लेषणों से पता चलता है कि केवल जीवनशैली या महौल ही इन सबके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले दोस्तों में भी एक-दूसरे की आदतों का असर बरक़रार रहता है. सामाजिक संबंध प्रोफ़ेसर निकोलस क्रिस्टाकिस के अनुसार ऐसा नहीं कि मोटे या पतले लोग अपनी ही तरह के दोस्त तलाश करते हैं. बल्कि आमतौर पर मोटे लोगों के साथ रहने वालों में मोटापे से परहेज़ की भावना कम या ख़त्म हो जाती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजिंग विहैवियर एंड सोशल रिसर्च प्रोग्राम के डॉ रिचर्ड शुजमैन के अनुसार इस अध्ययन से लोगों के बीच मोटापा बढ़ने के ज़िम्मेदार आपसी सामाजिक संबंधों को प्रभावित करने वाले कारकों का पता चला है. मेडिकल वेट कंसर्न के डॉ. इयन कैम्पबेल का कहना है कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि मोटे लोगों में आपसी दोस्त बनने की प्रवृत्ति ज्यादा देखी जाती है. इसके साथ-साथ वज़न कम करने के लिए भी वह एक दूसरे को भावनात्मक सहयोग देते हैं.
लेकिन यूनिवर्सिटी आँफ लीड्स के प्रोफ़ेसर एंड्रयू हिल ने दोस्तों में देखा-देखी मोटे होने के अध्ययन को महज कयास करार दिया. उन्होंने मोटापे के लिए भोजन और व्यायाम को महत्वपूर्ण कारक बताया. हिल के मुताबिक़ यह आँकडे़ उपयोगी तो हो सकते हैं लेकिन वास्तविक जीवन में यह मोटे लोगों के लिए ज़्यादा उपयोगी साबित नहीं होने वाले क्योंकि आपसी संबंधों को प्रभावित करने वाले कारक बेहद जटिल होते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जर्मनी में मोटापे के ख़िलाफ़ जंग23 मई, 2007 | पहला पन्ना ख़ूबसूरती के लिए क़र्ज़20 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना मोटापा घटाने के लिए मंत्री नियुक्त23 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना बड़े इलाक़े बढ़ाएँ मोटापा01 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना मोटापा घटाने की मुहिम02 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||