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सबको है एलन की रिहाई का इंतज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा में बीबीसी के रिपोर्टर एलन जॉन्स्टन आज अपहर्ताओं की क़ैद में 100वाँ दिन बिता रहे हैं. मैं अक्सर सोचता हूँ कि एलन अपना दिन कैसे बिताते होंगे? वह आदमी जो सुबह सारे अख़बार पढ़कर, बीबीसी के कई पत्रकारों से फ़ोन पर बात करने के बाद मीटिंग में अपना लाल रजिस्टर लिए पहुँचता था, क्या उसे अख़बार मिल रहे होंगे पढ़ने के लिए? एलन के साथ कुछ महीने तक काम करने का मौक़ा मिला जब मैं अँगरेज़ी के कार्यक्रम 'वर्ल्ड टुडे' में गया, अक्सर सफ़ेद या नीली सूती कमीज़ पहनने वाले एलन उन चंद लोगों में थे जो अपने उड़ चुके बालों पर शोक नहीं मनाते उस पर बल्कि हँसते. एलन ख़बरों को लेकर चुस्त-चौकन्ने थे और हमेशा दक्षिण एशिया के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहते थे, न्यूज़रूम में ख़बरों की आपाधापी के बीच मैंने एलन को कभी अपना संतुलन खोते, चिढ़ते या झल्लाते नहीं देखा. एलन से मेरी पहली मुलाक़ात तब हुई जब वे अफ़ग़ानिस्तान में एक साल काबुल संवाददाता रहने के बाद लंदन लौटे थे, मेरा बीबीसी का अनुभव सिर्फ़ एक वर्ष का था और एक नए कार्यक्रम के लिए काम करते हुए मैं थोड़ा घबरा भी रहा था. मुझे याद है कि एलन उन लोगों में थे जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे आश्वस्त किया कि मैं भारत के मामलों का जानकार हूँ इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ काम करूँ. अनुभवी पत्रकार अँगरेज़ी साहित्य में एमए कर चुके एलन बहुत अनुभवी पत्रकार हैं, अफ़ग़ानिस्तान में संवाददाता रहने से पहले उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में भी रिपोर्टर रहे.
एक बार मैंने एलन से पूछा, "काबुल, ताशकंद के बाद लंदन में डेस्क पर बैठकर काम करना आपके भीतर के रिपोर्टर को खलता नहीं?" एलन ने हँसते हुए कहा, "मुझे एक ही काम करते रहना खलता है, जब खलने लगेगा तो फिर कहीं चला जाऊँगा." तंज़ानिया में जन्म, स्कॉटलैंड और वेल्स में पढ़ाई, लंदन, ताशंकद, काबुल और ग़ज़ा में नौकरी, एलन ने काफ़ी कुछ देखा जिसने उन्हें एक बहुत शालीन और विनम्र व्यक्ति बनाया. ऐसे सभ्य और शालीन व्यक्ति से अपहर्ता किस तरह पेश आ रहे होंगे यह सोचकर मन दुखी हो उठता है, यही मानने को दिल करता है कि अपहर्ताओं की ओर से जारी किए गए वीडियो में कही एलन की बात सच हो. एक जून को अपहर्ताओं ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें एलन ने कहा था कि वे स्वस्थ हैं और उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है. एलन जॉन्स्टन के दोस्त उनका इंतज़ार उनके अपहरण से पहले से कर रहे थे क्योंकि वे 2004 में तीन वर्ष के लिए गज़ा गए थे और बस लंदन लौटने ही वाले थे. यह इंतज़ार कुछ ज़्यादा ही लंबा हो गया है, सब प्रार्थना कर रहे हैं कि देर तो हुई मगर एलन सही-सलामत लौट आएँ, मुझ जैसे किसी नए पत्रकार का हौसला बढ़ाने के लिए. | इससे जुड़ी ख़बरें एलन के 'अपहर्ताओं' ने माँगें सामने रखीं09 मई, 2007 | पहला पन्ना 'पत्रकारों पर बढ़ रहे हैं हमले'03 मई, 2007 | पहला पन्ना जॉन्स्टन की रिहाई के लिए वेबसाइट22 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'लापता बीबीसी संवाददाता जीवित हैं'20 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना एलन जॉनस्टन के समर्थन में रैलियाँ07 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना गज़ा से बीबीसी संवाददाता लापता12 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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