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रुश्दी के सम्मान पर ईरान को आपत्ति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय मूल के विवादित अंग्रेज़ी लेखक सलमान रुश्दी को नाइटहुड के ख़िताब से सम्मानित करने के ब्रितानी सरकार के फ़ैसले की ईरान ने आलोचना की है. उनकी किताब सैटनिक वर्सेज़ को लेकर मुस्लिम जगत में ख़ासा विवाद हुआ था और 1989 में ईरान के आध्यात्मिक नेता ने उनके ख़िलाफ़ मौत का फ़तवा जारी कर दिया था. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली हुसैनी ने कहा है कि नाइटहुट देने का फ़ैसला ब्रितानी अधिकारियों के इस्लाम के प्रति रुख़ को दर्शाता है. मोहम्मद अली हुसैनी ने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "एक ऐसे व्यक्ति को सम्मानित किया गया है जिसकी गिनती इस्लाम जगत में सबसे नापसंद किए जाने वाले लोगों में होती है, ये ब्रितानी अधिकारियों के इस्लाम-विरोधी रुख़ को दर्शाता है. ऐसे धर्मत्यागी को सम्मान देना ब्रितानी अधिकारियों को इस्लामी समाज के ख़िलाफ़ लाकर खड़ा करता है." उन्होंने कहा कि नाइटहुड देने का फ़ैसला दिखाता है कि इस्लामी भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धारणा का पश्चिमी देश समर्थन करते हैं. 59 वर्षीय सलमान रुश्दी समेत 950 लोगों को ब्रिटेन की महारानी के जन्मदिवस के मौक़े पर सम्मान देने की घोषणा की गई थी. इन सब लोगों का नामांकन सार्वजनिक संगठनों ने किया था. उधर ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने ईरान के बयान पर टिप्पणी करने से कर दिया है. मंत्रालय का कहना था कि सर सलमान रुशदी इस सम्मान के हक़दार थे. फ़तवा 1989 में सैटनिक वर्सेज़ के बाद फ़तवा जारी होने के कारण सलमान रुश्दी को क़रीब दस सालों तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहना पड़ा था. कई देशों ने इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि 1998 में ईरान सरकार ने कहा था कि वो अब फ़तवे का समर्थन नहीं करती है लेकिन कई गुटों का कहना है कि इसे वापस नहीं लिया जा सकता है. मुंबई के एक सफल व्यावसायी के बेटे सलमान रुश्दी का जन्म 1947 को मुंबई में एक मुस्लिम परिवार में हुआ. उनकी शिक्षा इंग्लैंड के रग्बी स्कूल में हुई और फिर उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की. विज्ञापन की दुनिया से अपना करियर शुरू करने वाले रुश्दी बाद में पूर्णकालिक लेखक हो गए. उनका पहला उपन्यास 'ग्रिमस' 1975 में आया था. उनके दूसरे उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' ने उन्हें साहित्य जगत में ख्याति दिलवाई और 1981 में उन्हें बुकर सम्मान दिया गया. 1993 में उन्हें विशेष सम्मान 'बुकर ऑफ़ बुकर्स' दिया गया क्योंकि उनके उपन्यास को 25 बरसों में बुकर सम्मान से सम्मानित किताबों में सबसे अच्छा माना गया. | इससे जुड़ी ख़बरें सलमान रुश्दी को 'नाइटहुड'16 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस सलमान रुश्दी बुकर की दौड़ से बाहर09 सितंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस इस्लाम में सुधार ज़रूरीः रुश्दी11 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना सलमान रुश्दी का मुंबई में विरोध12 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा बरक़रार15 फ़रवरी, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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