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शनिवार, 02 जून, 2007 को 06:58 GMT तक के समाचार
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फ़लीस्तीनी गुट जॉन्सटन पर 'एक मत'
एलन जॉन्सटन
एलन जॉन्सटन की रिहाई के लिए दुनिया भर में अपील की गई है
एक वरिष्ठ फ़लीस्तीनी अधिकारी ने कहा है बीबीसी संवाददताता एलन जॉन्सटन के अपहरण की निंदा करने और उनके रिहाई के मसले पर सभी गुटों में एक मत है.

फ़लस्तीनी नेता मोहम्मद अब्बास के सलाहकार सएब इराकत ने कहा कि उन्हें मुक्त कराने के लिए सैन्य कार्रवाई न्यायोचित होगी.

उनका यह बयान इंटरनेट पर एलन जॉन्सटन का वीडियो जारी होने के बाद आया है.

गत 12 मार्च को गज़ा में जॉन्सटन का अपहरण कर लिया गया था और तब से यह उनकी पहली तस्वीर है.

दूसरी ओर जॉन्सटन के माता-पिता ने वीडियो जारी होने के बाद खुशी जताई है. ग्राहम और मारग्रेट जॉन्सटन ने कहा है कि इससे उम्मीद की नई किरण दिख रही है.

जॉन्सटन के पिता ने कहा, ''उसे इस परिस्थिति में देखना दुखद है लेकिन वह स्वस्थ दिख रहे थे. लगता है अपहर्ताओं ने उनकी ठीक से देखभाल की है.''

उन्होंने कहा, ''हम जॉन्सटन की जल्दी रिहाई के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.''

दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गए ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि जॉन्सटन की सुरक्षित रिहाई के लिए ब्रिटिश सरकार हर संभव क़दम उठा रही है.

बीबीसी ने अपने बयान में कहा है, ''जॉन्सटन, उनके सहयोगियों और दोस्तों के लिए यह काफ़ी दुखद समय है. हम एक बार फिर उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील करते हैं.''

माँग

इंटरनेट पर कथित तौर पर आर्मी ऑफ़ इस्लाम की ओर से जारी वीडियो में दावा किया गया है कि बीबीसी संवाददाता उनके कब्ज़े में है.

वीडियो में एलन जॉन्सटन को कहते हुए दिखाया गया है कि उनका स्वास्थ्य अच्छा है और उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है.

अल-इख़लास वेबसाइट पर जारी इस वीडियो से यह ज़ाहिर नहीं होता कि ये तस्वीरें कब ली गईं थीं. और यह भी पता नहीं चलता कि वे किन परिस्थितियों में हैं.

लाल रंग की स्वेटशर्ट पहने जॉन्सटन को कहते हुए दिखाया गया है कि पश्चिमी देशों को फ़लस्तीनी सरकार के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंध हटा लेने चाहिए.

वे कह रहे हैं कि ब्रितानी सरकार लोगों की इच्छा के विरुद्ध मुसलमानों की ज़मीनें लेने की कोशिश कर रही है.

वीडियो के अंत में आर्मी ऑफ़ इस्लाम ने मौलवी अबू क़तादा को रिहा करने की माँग की है.

फ़लस्तीनी मूल के क़तादा इस्लामी कट्टरपंथी माने जाते हैं और उन पर अल क़ायदा से संबंध होने का भी संदेह है.

ब्रिटिश सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हुए गिरफ़्तार किया हुआ है.

'सैन्य कार्रवाई'

इधर बीबीसी के एक कार्यक्रम में इराकत ने कहा, '' वीडियो से स्पष्ट है कि जॉन्सटन जीवित हैं लेकिन वे जो कह रहे थे वह दबाव में दिया गया बयान है.''

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी अधिकारियों को आर्मी ऑफ़ इस्लाम के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

 इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और हमें इनके ठिकाने के बारे में पता लगा कर आगे बढ़ना चाहिए और जरूरत पड़े तो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटनी चाहिए.
सएब इराकत, मोहम्मद अब्बास के सलाहकार

इराकत ने कहा,'' ये लोग महज गुंडे हैं और किसी गुट से जुड़े नहीं हैं.''

उन्होंने कहा कि मोहम्मद अब्बास अपनी कैबिनेट और सभी गुटों पर जॉन्सटन की रिहाई के लिए दबाव डाल रहे हैं.

इराकत ने कहा,'' इस मसले पर फ़तह, हमास और अन्य सभी गुट और प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के एक मत हैं.''

उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और हमें इनके ठिकाने के बारे में पता लगा कर आगे बढ़ना चाहिए और जरूरत पड़े तो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटनी चाहिए.

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