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गैरी कैस्परोफ़ मॉस्को में गिरफ़्तार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस में पुलिस ने पूर्व शतरंज चैम्पियन और विपक्षी नेता गैरी कैस्परोफ़ को मॉस्को में गिरफ़्तार कर लिया है जब वह सरकार विरोधी एक रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विरोधियों को पुश्किन चौक पर इकट्ठा होने से रोकने के लिए एक बड़ा सुरक्षा अभियान चलाया गया और इस अभियान में गैरी कैस्परोफ़ को भी गिरफ़्तार कर लिया गया. पूर्व विश्व शतरंज चैम्पियन गैरी कैस्परोफ़ यूनाइटेड सिविल फ्रंट का नेतृत्व करते हैं और यह गुट विपक्षी दलों के गठबंधन अदर रसिया का हिस्सा है. विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार लोकतंत्र का दुरुपयोग कर रही है जबकि सरकार का कहना है कि विपक्षी गठबंधन देश को अस्थिर बनाने के लिए काम कर रहा है. समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी है कि गैरी कैस्परोफ़ को गिरफ़्तारी के बाद जब पुलिस वाहन में ले जाया जा रहा था तो उन्होंने हाथ हिलाकर पत्रकारों का अभिवादन किया. ख़बरों में कहा गया है कि गैरी कैस्परोफ़ के अलावा अन्य अनेक विपक्षी कार्यकर्ताओं और कुछ पत्रकारों को भी गिरफ़्तार किया गया. मॉस्को में बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉजर्स का कहना था कि विपक्षी दलों के प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे और लोगों को रैली के स्थल तक भी पहुँचने से रोका गया. रैली स्थल पर लोगों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए लगभग नौ हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए गए. बीबीसी संवाददाता का कहना था कि गैरी कैस्परोफ़ की गिरफ़्तारी से पहले इस तरह की चेतावनियाँ दी गईं कि जो भी व्यक्ति रैली में हिस्सा लेने के लिए पहुँचेगा उसे गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. यह रैली रूस सरकार की उस चेतावनी के बाद निकालने का फ़ैसला किया गया जिसमें सरकार ने कहा था कि लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे बोरिस बेरेज़ोव्सकी को प्रत्यर्पित करते देश में लाना चाहती है. बोरिस बेरेज़ोव्सकी ने लंदन के गार्डियन अख़बार से कहा था कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार का तख़्ता पलट करने के लिए योजना बना रहे हैं. रूस में व्लादिमीर पुतिन सरकार को सर्वाधिकार वाली सरकार होने का आरोप लगाते हुए बोरिस बेरेज़ोव्सकी ने कहा कि रूस के मौजूदा नेतृत्व को सिर्फ़ ताक़त से ही हटाया जा सकता है. हालाँकि बाद में बोरिस ने अपने शब्दों में कुछ फेरबदल करते हुए कहा कि वह सिर्फ़ "हिंसा रहित बदलाव" का समर्थन करते हैं क्योंकि वह हिंसा के रास्ते के ख़िलाफ़ हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पुतिन को कास्पारोव की चुनौती20 जनवरी, 2004 | पहला पन्ना कंप्यूटर से हारे नहीं गैरी कास्पारोव19 नवंबर, 2003 | खेल कंप्यूटर से कास्पारोव का मुक़ाबला ड्रॉ13 नवंबर, 2003 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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