|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कंप्यूटर से कास्पारोव का मुक़ाबला ड्रॉ
विश्व के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्पारोव और कंप्यूटर के बीच हुई पहली बाज़ी ड्रॉ हो गई. दोनों के बीच चार बाज़ियाँ होनी हैं. दोनों के बीच ये मुक़ाबला लगभग तीन घंटे 20 मिनट चला और सैंतीसवीं चाल के बाद कास्पारोव और कंप्यूटर दोनों ही ड्रॉ पर राज़ी हो गए. कास्पारोव इससे पहले भी कंप्यूटर के विरुद्ध खेल चुके हैं. उन्होंने 1996 में आईबीएम के कंप्यूटर को शतरंज की बाज़ी में मात दे दी थी मगर उसके अगले साल वह उससे मात खा भी गए थे. सोमवार की बाज़ी के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि कंप्यूटर की उस प्रौद्योगिकी के साथ उन्हें कुछ मनोवैज्ञानिक दिक़्क़तें थीं. चालीस वर्षीय ग्रांडमास्टर ने कहा, "तकनीकी तौर पर परिस्थिति बहुत आसान नहीं थी. मेरे ख़्याल से मैं अपनी स्थिति मज़बूत करने की एक चाल गँवा बैठा." सफेद मोहरों से खेलने वाले कास्पारोव ने बेहतरीन चालें चलीं मगर वह कंप्यूटर के राजा को शह देने में क़ामयाब नहीं हो सके. ये मुक़ाबला न्यूयॉर्क में हो रहा है और अगली भिड़ंत गुरुवार को होगी. अंतिम दोनों बाज़ियाँ 16 और 18 नवंबर को खेली जाएँगी. इस कंप्यूटर प्रोग्राम का नाम एक्सथ्रीडी फ़्रिट्ज़ रखा गया है. ड्रॉ होने की वजह से दोनों को ही आधे-आधे अंक दिए गए. कास्पारोव अगर मैच जीत जाते हैं तो उन्हें दो लाख डॉलर दिए जाएँगे. बाज़ी ड्रॉ रहने पर पौने दो लाख और यहाँ तक की हारने पर भी उन्हें डेढ़ लाख डॉलर मिलेंगे. कास्पारोव ने 1996 में आईबीएम के कंप्यूटर डीप ब्ल्यू को हराया था मगर जब प्रोग्राम बेहतर किया गया तो अगले साल वह उससे हार भी गए थे. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||