|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुतिन को कास्पारोव की चुनौती
रूस में उदारवादियों का एक गुट इस कोशिश में जुटा हुआ है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2008 के बाद अपने पद पर न बने रहें. और इस गुट के नेता हैं शतरंज के विश्व चैम्पियन गैरी कास्पारोव, जो राष्ट्रपति पुतिन के विरोधी हैं. जिस तरह यह गुट 2008 की बात कर रहा है उससे यह स्पष्ट है कि वे इसी साल मार्च में होने वाले चुनाव में राष्ट्रपति पुतिन को चुनाव जीतकर फिर राष्ट्रपति बनने से नहीं रोक पाएँगे. इस गुट ने कहा है, ''हम मानते हैं कि हमारा बहुमत नहीं है लेकिन अल्पसंख्यक इस बात पर एकमत हैं कि रूस में लोकतंत्र ख़तरे में है.'' पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में राष्ट्रपति पुतिन की पार्टी को 450 सीटों वाली संसद में 300 सीटें मिली थीं जबकि दो उदारवादी पार्टी हाशिए पर रह गई थीं. एक रुसी अख़बार से बात करते हुए कास्पारोव ने कहा, ''यूनियन ऑफ़ राइट फ़ोर्सेस और याबलोको दो ऐसी पार्टियाँ थीं जो लोकतंत्र की प्रतिनिधित्व करती थीं लेकिन उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया गया है.'' उन्होंने कहा, ''हमें नए सिरे से शुरुआत करनी होगी.'' कास्पारोव के गुट का नाम ''2008 : फ़्री च्वाइस'' रखा गया है. इस गुट का मानना है कि राष्ट्रपति पुतिन संसद और मीडिया पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं. उनका मानना है कि वे 2008 में नए राष्ट्रपति का चुनाव कर सकेंगे. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||