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रूस के चुनाव पर अमरीका की चिंता
रूस में हुए संसदीय चुनाव की निष्पक्षता पर यूरोपीय मानवाधिकार अधिकारियों के बाद अब अमरीका ने भी चिंता जाहिर की है. रविवार को हुए इन चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगियों को स्पष्ट बहुमत मिला है. मगर 'ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर सिक्योरिटी ऐंड कोऑपरेशन इन यूरोप' (ओएससीई) का कहना है कि रूस की सरकार ने संसाधनों और मीडिया पर नियंत्रण का इस्तेमाल चुनाव में किया है. इसके बाद अमरीका ने भी कहा कि वह भी यूनाइटेड रूस पार्टी की जीत के तरीक़े पर यूरोप की तरह ही चिंतित है. ओएससीई के रूस में लगभग 400 पर्यवेक्षक थे और उनका कहना है कि करदाताओं के धन और सरकारी टेलिविज़न का इस्तेमाल कुछ पार्टियों को आगे करने के लिए किया गया. मगर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन चुनाव को लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक और क़दम बताया. विशेषज्ञों के मुताबिक़ पुतिन को अब इस बात का भरोसा हो गया है कि मार्च में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वह चुने जा सकेंगे. इसके अलावा अगर यूनाइटेड रूस पार्टी और उसके समर्थक दो तिहाई सीटें पा लेते हैं तो वे रूस का संविधान भी बदल सकेंगे और इस तरह पुतिन के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता भी साफ़ हो सकता है. बीबीसी से स्टीफ़न डैलज़िएल का कहना है कि ये नतीजे कम्युनिस्टों के लिए बड़ी पराजय के रूप में देखे जा रहे हैं. पुतिन चार वर्ष से सत्ता में हैं और इसके बाद भी उनका समर्थन बना हुआ है. इसके अलावा भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठाए उनके क़दमों को लेकर मतदाताओं के बीच काफ़ी अच्छी प्रतिक्रिया हुई है. |
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