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बुधवार, 04 अप्रैल, 2007 को 12:43 GMT तक के समाचार
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अजी हम से छुपकर कहाँ जाइएगा...
सीसीटीवी कैमरा
कैमरों से लोगों पर नज़र रखने का चलन दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ रहा है
हममें से किसी के लिए भी यह शायद बहुत आसान होता है कि केला खाकर छिलका सड़क पर ही फेंक दें और इस तरफ़ ध्यान भी नहीं जाता कि उस रास्ते से गुज़रने वाले किसी व्यक्ति का पैर अनजाने में अगर उस छिलके पर पड़ जाए तो...

भारत जैसे देश में साफ़-सफ़ाई के लिए रखे गए कर्मचारी इस काम को करते हैं यानी आम रास्तों पर फेंके गए कचरे को उठाकर कूड़ेदानों में डालते हैं लेकिन सड़कों पर कचरा साफ़ करने के काम पर क़रीब पचास करोड़ पाउंड हर साल ख़र्च करने वाले ब्रिटेन जैसे विकसित देश को इस समस्या से निपटने का एक नया रास्ता सूझा है.

ब्रिटेन सरकार सरकार ने सड़कों पर अब ऐसे कैमरे लगाने शुरू किए हैं जो सिर्फ़ तस्वीरें ही रिकॉर्ड नहीं करते बल्कि ज़रूरत पड़ने पर चेतावनी भी जारी करते हैं और राहगीरों की बात भी सुनते हैं.

यह सब होता है उस नियंत्रण केंद्र से जहाँ उन कैमरों का संचालन किया जाता है और अगर कोई व्यक्ति सड़क पर कोई गंदगी या कचरा फैलाता हुआ या फिर कोई असामाजिक हरकत करता हुआ नज़र आता है तो वे उन कैमरों के ज़रिए उस व्यक्ति से अनुरोध कर सकते हैं कि कृपया यह कचरा कूड़ेदान में डालें और अपना बर्ताव सही करें.

फिलहाल इस तरह के कैमरे प्रयोग के तौर पर इंग्लैंड की एक काउंसिल मिडिल्सब्रो में लगाए गए हैं और गृहमंत्री जॉन रीड ने कहा है कि बीस अन्य इलाक़ों में इस तरह के कैमरे लगाए जाएंगे जिसके लिए धनराशि भी आबंटित की जा रही है.

गृहमंत्री जॉन रीड ने कहा है कि पहले से लगाए गए कैमरों में लाउड स्पीकर की सुविधा लगाने के लिए पाँच लाख पाउंड की राशि आबंटित की जा रही है.

जबकि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के कैमरे लगाने की इस पहल का विरोध करने वालों का कहना है कि यह सीधे तौर पर लोगों की निजी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी है.

गृहमंत्री जॉन रीड ने बीबीसी से कहा, "आपको ऐसे भी लोग मिल जाएंगे जो लोगों की नागरिक स्वतंत्रताओं में दख़लअंदाज़ी की दुहाई देंगे लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम ही होगी."

जॉन रीड ने कहा, "बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनकी ज़िंदगी ऐसे लोगों से प्रभावित होती है जो शहर के बीचों-बीच हुड़दंग करते हैं और इस वजह से सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा सुरक्षित और साफ़-सुधरा माहौल नहीं होता कि पारिवारिक लोग वहाँ घूमने-फिरने जा सकें."

'ख़ुफ़िया नहीं हैं'

जॉन रीड ने स्पष्ट किया कि "बातचीत करने वाले ये कैमरे ख़ुफ़िया निगरानी" नहीं करते. उन्होंने कहा कि ये कैमरे सार्वजनिक हैं यानी खुले रूप से लगाए जा रहे हैं और अगर कोई व्यक्ति चाहे तो इन कैमरों के ज़रिए नियंत्रण केंद्र में बैठे कर्मचारियों से भी बातचीत कर सकता है.

निगरानी कैमरे

जॉन रीड ने दिलचस्प बात बताते हुए कहा कि इन कैमरों की आवाज़ बनने के लिए स्कूलों में प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी ताकि इन कैमरों के ज़रिए दी जाने वाली चेतावनियों को विनम्र और दिलचस्प बनाया जा सके.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि इस तरह के कैमरे लगाने की योजना काफ़ी कारगर साबित हो रही है क्योंकि इनके ज़रिए यह संदेश असरदार तरीके से दिया जा सकता है कि मेहरबानी करके सड़कों पर गंदगी ना फेंकें क्योंकि वो गंदगी साफ़ करने के लिए किसी और को तकलीफ़ करनी पड़ेगी और उस पर धन भी ख़र्च होगा.

मिडिलस्लब्रो काउंसिल के एक नेता बैरी कोपिंगर का कहना है कि इस योजना से सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले लड़ाई झगड़े कम करने और गंदगी फैलने से रोकने में काफ़ी हद तक मदद मिली है.

लेकिन इस योजना के विरोधी स्टीव हिल्स का कहना था, "ये एक बेतुकी योजना है और मेरा ख़याल है कि यह बड़े दुख की बात है कि बिना चेहरे वाले कैमरे हम पर भोंकते नज़र आएं और यह भी पता ना चले कि वो आदेश कहाँ से आ रहा है..."

पूरे ब्रिटेन में लगभग बयालीस लाख कैमरे लगे हैं जो सार्वजनिक स्थानों पर लोगों पर रात-दिन नज़र रखते हैं.

ब्रिटेन के सूचना आयुक्त ने हाल ही में आगाह करते हुए कहा था कि देश अब एक ऐसा समाज बनता जा रहा है जहाँ लोगों की ज़िंदगी के बड़े हिस्से पर कैमरों के ज़रिए निगरानी होती है.

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