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शनिवार, 31 मार्च, 2007 को 13:20 GMT तक के समाचार
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'नौसैनिकों पर मुक़दमा चल सकता है'
बंधक ब्रितानी नौसैनिक
ईरान बंधक ब्रितानी नौसैनिकों की तस्वीरें सरकारी टेलीविज़न पर दिखा चुका है
रूस में ईरान के राजदूत ग़ुलाम रज़ा अंसारी ने कहा है कि ब्रिटेन के जिन 15 नौसैनिकों को पिछले सप्ताह खाड़ी में हिरासत में लिया गया था, उन पर अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ने का मुक़दमा चलाया जा सकता है.

ग़ौरतलब है कि ईरान ने पंद्रह ब्रितानी नौसैनिकों को पिछले सप्ताह खाड़ी में यह कहते हुए हिरासत में ले लिया था कि वे अवैध रूप से ईरानी जलक्षेत्र में घुस आए थे जबकि ब्रिटेन इस आरोप को ग़लत बताता है.

ये ब्रितानी नौसैनिक तभी से ईरान की हिरासत में हैं और इस मुद्दे पर दोनों देशों की बीच कूटनीतिक तकरार चल रही है.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने ग़ुलाम रज़ा अंसारी के हवाले से कहा है कि ब्रितानी नौसेना के इन नाविकों और मरीनों की ग़लती साबित करने के लिए क़ानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है.

ग़ुलाम रज़ा अंसारी ने शनिवार को यह बात एक रूसी टेलीविज़न चैनल से बातचीत में कही है.

पिछले कई दिनों से ये अटकलबाज़ी चल रही थी कि इस टकराव में ईरान का अगला क़दम क्या होगा और उसके बाद ग़ुलाम रज़ा अंसारी का ये बयान आया है कि ब्रितानी सैनिको के ख़िलाफ़ क़ानूनी प्रक्रिया की शुरूआत कर दी गई है.

लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से कुछ भी नहीं बताया और तेहरान से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

पिछले कुछ दिनों से कई ईरानी अधिकारियों ने इन सैनिकों के ख़िलाफ़ किसी न किसी तरह की क़ानूनी कार्रवाई की बात की है लेकिन काफ़ी गोलमोल शब्दों में.

वैसे अंसारी ने एक कूटनीतिक समझौते की संभावना से भी इनकार नहीं किया है. उन्होंने कहा है कि ये मामला आसानी से सुलझ सकता है यदि ब्रिटेन सरकार अपनी ग़लती मान ले और ईरान से इस बात की माफ़ी मांगे कि उसके सैनिकों ने ईरानी जलसीमा का उल्लंघन किया.

ब्रिटेन का कहना है कि उनके सैनिकों को इराक़ी सीमा से हिरासत में लिया गया है.

ब्रिटेन की विदेश मंत्री मार्गरेट बेकेट ने कहा है कि उनकी सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती हैं, "हम इसका कोई हल चाहते हैं, शांतिपूर्ण और जल्द से जल्द. साथ ही हम चाहेंगे कि हमें बताया जाए कि हमारे सैनिक कहाँ हैं और हमें उनसे मिलने दिया जाए."

लेकिन पिछले कुछ दिनों से ब्रिटेन ने जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया है, ईरानी अधिकारियों का रुख़ और कड़ा होता गया है और उनका कहना है कि ब्रिटेन अड़ियल रुख़ अपना रहा है जिसकी वो भर्त्सना करते हैं.

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