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ईरान में इस्लामी क्रांति क्यों हुई? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान की इस्लामिक क्रांति कब हुई थी. यह सवाल किया है ग्राम मोखेरी, जोधपुर राजस्थान से बी एल परिहार और वीरू मोना परिहार ने. ईरान की इस्लामिक क्रांति सन 1979 में हुई थी जिसने ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को अपदस्थ कर, आयतुल्लाह रुहोल्लाह ख़ोमैनी के अधीन एक लोकप्रिय धार्मिक गणतंत्र की स्थापना की. शाह 1941 से सत्ता में थे लेकिन उन्हें निरंतर धार्मिक नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ता था. इससे निपटने के लिए शाह ने इस्लाम की भूमिका को कम करने, इस्लाम से पहले की ईरानी सभ्यता की उपलब्धियां गिनाने और ईरान को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने के लिए कई क़दम उठाए जिससे मुल्लाह और चिढ़ गए और उन्हें अमरीका का पिट्ठू कहने लगे. आयतुल्लाह ख़ोमैनी भी शाह के सुधारों के ख़िलाफ़ थे. तभी तो उन्हें गिरफ़्तार करके देश से निकाल दिया गया था. इस बीच असंतोष बढ़ा और साथ ही शाह का दमन चक्र भी. लेकिन जब सरकारी प्रेस में आयतुल्लाह के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक कहानी छपी तो लोग भड़क उठे. दिसबर 1978 में कोई बीस लाख लोग शाह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने शाहयाद चौक में जमा हुए. लेकिन इस बार सेना ने उनपर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. फिर प्रधानमंत्री डॉ शापोर बख़्तियार की मांग पर सोलह जनवरी 1979 को शाह और उनकी पत्नी ईरान छोड़कर चले गए. प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया और ख़ोमैनी को ईरान आने दिया. प्रधानमंत्री चुनाव कराना चाहते थे लेकिन ख़ोमैनी ने उनकी एक न चलने दी और ख़ुद ही एक अंतरिम सरकार का गठन कर लिया. गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंग बहादुर सिंह और उमा सिंह ने पूछा है कि राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन क्यों और कब हुआ और इसके अध्यक्ष और सदस्यों का चयन कैसे होता है. भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने 13 जून 2005 में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन किया था. इसका लक्ष्य है ऐसे सुधारों की दिशा तय करना जिससे आने वाले सालों में भारत एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सके. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ ख़ास क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें शिक्षा, विज्ञान, तकनोलॉजी, कृषि, उद्योग और ई गवर्नेंस शामिल हैं. अगले कुछ दशकों में विश्व की अधिकांश युवा जनसंख्या भारत में होने की संभावना है. इसलिए यह प्रयास करना है कि इनका ज्ञान वर्द्धन किया जा सके. आयोग को अपनी रिपोर्टे और सिफ़ारिशें पेश करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है. आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को प्रधानमंत्री ने अलग-अलग क्षेत्रों से चुना है. महंथवार दरभंगा बिहार से कल्पना भारद्वाज पूछती हैं कि विश्व कप फ़ुटबॉल का पहला आयोजन किस वर्ष में और कहाँ किया गया था.
विश्व कप फ़ुटबॉल यानी फ़ीफ़ा विश्व कप, खेल की दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है. फ़ेडरेशन इंटरनेशनल डी फ़ुटबॉल एसोसिएशन (फ़ीफ़ा) का गठन 1904 में पेरिस में हुआ था. 1920 के दशक में फ़ीफ़ा के अध्यक्ष जूल्स रिमैट और फ़्रांस के फ़ुटबॉल प्रशासकों ने दुनिया की बेहतरीन फ़ुटबॉल टीम तय करने के लिए प्रतियोगिता कराने का विचार किया. 1929 में फ़ीफ़ा ने एक प्रस्ताव पारित करके विश्व कप फ़ुटबॉल आयोजित कराने का फ़ैसला किया. पहली प्रतियोगिता 1930 में उरुगुए में हुई थी जिसे उरुगुए की टीम ने ही जीता था. तब से यह प्रतियोगिता हर चार साल पर आयोजित होती है. हालांकि दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में विश्व कप फ़ुटबॉल का आयोजन नहीं हुआ था. विश्व का सबसे ऊँचा जल प्रपात कौन सा है और उसकी कितनी ऊँचाई है. ग्राम छबिलापुर, रोहतास बिहार से अभिषेक कुमार. सबसे ऊँचा जल प्रपात या झरना दक्षिणी अमरीकी देश वेनेज़ुएला में है जिसे साल्तो ऐंजिल के नाम से जाना जाता है. सन 1935 में जिमी एंजिल नाम के एक अमरीकी विमान चालक सोने की खोज में इस इलाक़े के ऊपर उड़ रहे थे. उन्होने इस पर्वत शिखर पर अपना विमान उतारा तो उन्हे इस झरने का पता चला. यह पहाड़ की चोटी से 3212 फ़िट नीचे गिरता है. वेनेज़ुएला की गयाना पहाड़ियों में इस तरह के सौ से अधिक झरने हैं. क्लियोपैट्रा कहां की महारानी थीं. जानना चाहते हैं गांव चौहतन, बाड़मेर राजस्थान से रेखाराम सियाग, हीराराम भाम्भू और गोमाराम चौधरी. क्लियोपैट्रा प्राचीन मिस्र की रानी थी लेकिन मिस्र के इतिहास में उनकी बहुत अहमियत नहीं मानी जाती. उनका जन्म 69 वर्ष ईसापूर्व में हुआ. जब वे 18 साल की थीं तो उनके पिता का देहांत हो गया. उनकी वसीयत के अनुसार क्लियोपैट्रा और उनके छोटे भाई को संयुक्त रूप से मिस्र का साम्राज्य मिला. क्लियोपैट्रा बड़ी महत्वाकांक्षी थीं. उन्होंने सत्ता पूरी तरह से हथियाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई और उन्हें ऐलैक्ज़ैन्ड्रिया निर्वासित कर दिया गया. इसी बीच जब उन्हें पता चला कि रोम के सम्राट जूलियस सीज़र उत्तराधिकार का निपटारा करने मिस्र आए हैं तो वे भी गुप्त रूप से मिस्र लौट आईं. क्लियोपैट्रा ने जूलियस सीज़र का समर्थन हासिल किया. युद्ध में क्लियोपैट्रा के भाई मारे गए और क्लियोपैट्रा की स्थिति मज़बूत हो गई. क्लियोपैट्रा ने महीनों रोम के सम्राट की ख़ातिरदारीं की और उन्हें एक बेटा भी दिया. जब क्लियोपैट्रा अपने बेटे को लेकर रोम पहुंची और जूलियस सीज़र ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया तो रोमवासी ख़ुश नहीं हुए. एक महीने के भीतर ही सीज़र की हत्या हो गई और क्लियोपैट्रा ऐलैक्ज़ैन्ड्रिया भाग आईं. सीज़र की हत्या के बाद मार्क ऐन्टनी मिस्र पहुंचे तो क्लियोपैट्रा ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया और कुछ साल बाद उनसे शादी कर ली. रोम के क़ानून में बहुविवाह की अनुमति नहीं थी और फिर मार्क ऐन्टनी की पहली पत्नी, उनके मित्र और सहयोगी ऑक्टेवियन की बहन थीं. एक तरफ़ मार्क ऐन्टनी पर क्लियोपैट्रा का प्रभाव बढ़ता रहा और दूसरी तरफ़ रोम में उनकी स्थिति कमज़ोर होने लगी. ऑक्टेवियन ने क्लियोपैट्रा पर हमला किया जिसमें क्लियोपैट्रा और मार्क ऐन्टनी हार गए. अंततः दोनों ने आत्महत्या कर ली. |
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