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रविवार, 25 मार्च, 2007 को 02:01 GMT तक के समाचार
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ईरान के ख़िलाफ़ और प्रतिबंध
ईरान का परमाणु संयंत्र
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है.

परमाणु कार्यक्रम रोकने से इनकार कर देने के बाद ईरान के ख़िलाफ़ ये प्रतिबंध लगाए गए हैं.

इससे पहले ईरान के ख़िलाफ़ दिसंबर 2006 में प्रतिबंध लगाए गए थे और ताज़ा प्रस्ताव के साथ प्रतिबंध और कड़े किए गए हैं.

इन नए प्रतिबंधों के साथ ईरान को हथियारों का निर्यात नहीं किया जा सकेगा और इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों के खाते सील किए जा सकेंगे.

ईरान के विदेश मंत्री मनोशेर मोत्तकी ने इस कार्रवाई को 'अवैध' और 'अनुचित' बताया है.

ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है और इसीलिए उसे रोकने से इनकार करता रहा है.

अमरीका सहित कई पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बनाने के लिए कार्यक्रम चला रहा है.

अब ईरान को 60 दिनों के भीतर अपना परमाणु कार्यक्रम रोकना होगा वरना ईरान पर और प्रतिबंध लगाए जाएँगे.

'नीति नहीं बदलेगी'

ईरान पर प्रतिबंध का फ़ैसला किए जाने के बाद सुरक्षा परिषद में ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, "हम कोई टकराव नहीं चाहते. मैं यह ज़रुर कहना चाहता हूँ कि दबाव और धमकी से ईरान की नीति नहीं बदलेगी."

प्रतिक्रिया
 शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाना संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सरासर उल्लंघन है
मनोशर मोत्तकी, विदेश मंत्री, ईरान

उनका कहना था कि प्रतिबंध न तो कोई विकल्प था और न हल.

उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाना संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सरासर उल्लंघन है."

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत एमिर जोन्स का कहना था, "सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1747 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए जाने का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ है."

बीबीसी की संयुक्त राष्ट्र संवाददाता लौरा ट्रैवेलियन का कहना है कि इस प्रस्ताव का सर्वसम्मति से पारित होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ईरान को यह संदेश तो गया ही है कि उनके परमाणु कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया गया है.

इस प्रस्ताव को छह देशों ने मिलकर तैयार किया है. इसमें सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य अमरीका, फ़्रांस, चीन, रुस, ब्रिटेन और इसके अलावा जर्मनी है.

दक्षिण अफ़्रीका, क़तर और इंडोनेशिया की आपत्ति के बाद इस प्रस्ताव में शब्दों का कुछ हेरफेर किया गया था.

वैसे इस प्रस्ताव पर चर्चा के समय ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ख़ुद मौजूद रहना चाहते थे.

ईरान के अधिकारियों का कहना है कि अमरीका ने वीज़ा देने में इतनी देर कर दी कि राष्ट्रपति न्यूयॉर्क नहीं पहुँच सके. जबकि अमरीका का कहना है कि वीज़ा समय से दे दिया गया था और जो कुछ ईरानी अधिकारी कह रहे हैं वह अहमदीनेजाद के न आने का बहाना भर है.

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