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शिराक नहीं लड़ेंगे राष्ट्रपति का चुनाव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने घोषणा की है कि वे राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे. राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविज़न पर की गई इस घोषणा से साफ़ हो गया है कि मई से वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं. साढ़े चार दशक तक फ़्रांस की राजनीति पर छाए रहे ज़्याक शिराक दो बार प्रधानमंत्री रहे, 18 बरस तक पेरिस के मेयर रहे और दो बार राष्ट्रपति रहे. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा 1962 में प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार के रुप में शुरु की थी. 1967 में उन्हें पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. लगातार 12 साल तक राष्ट्रपति रहने के बाद अपने भावपूर्ण संबोधन में 74 वर्षीय ज़्याक शिराक ने कहा कि वे फ़्रांस की जनता को तीसरे कार्यकाल के लिए अपने आपको चुनने का अनुरोध नहीं करेंगे. राजनीतिक विरासत ज़्याक शिराक अपने पीछे एक ऐसी राजनीतिक विरासत छोड़कर जा रहे हैं जिसमें तारीफ़ भी है और आरोप भी. उनके विरोधी कहते हैं कि वो उन सभी समस्याओं को नहीं सुलझा सके जिसका सामना इस समय फ़्रांस कर रहा है. इसमें धीमा आर्थिक विकास है, बढ़ती बेरोज़गारी है और दुनिया के नक्शे पर फ़्रांस की धूमिल सी छवि है. लेकिन शिराक़ के प्रशंसक इसके ठीक विपरीत मत के हैं. यहाँ तक कि उनके कुछ विरोधी भी फ़्रांस के हितों की रक्षा के लिए लड़ने के उनके तरीक़ों की तारीफ़ करते हैं. इराक़ पर हमले के मामले में अमरीका का विरोध करने के लिए फ़्रांस में आज भी उनकी इज़्ज़त की जाती है. उन पर हमेशा से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं लेकिन वे इसका खंडन करते आए हैं. हालांकि 1999 में संविधान परिषद ने उन्हें पद पर रहते हुए किसी भी मुक़दमे से मुक्त कर दिया था. उन्हें कभी बुल्डोजर कहा गया तो कभी गिरगिट. वे एक समय में यूरोप के सिद्धांत के ख़िलाफ़ थे और फिर उन्होंने ही यूरोप के लिए एक मुद्रा की वकालत की. ज़्याक शिराक को उनके मुँहफट होने के कारण भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा. मसलन उन्होंने एक बार कह दिया था कि ब्रितानियों पर इसलिए भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उनका खाना बहुत ख़राब होता है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं शिराक18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना सैनिकों की संख्या पर शिराक के सवाल25 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना फ्रांस में 'दासप्रथा स्मरण दिवस'10 मई, 2006 | पहला पन्ना रोज़गार क़ानून पर शिराक का आश्वासन31 मार्च, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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