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लूला विकसित देशों पर बरसे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्राज़ील के राष्ट्रपति इनाशियो लूला डी सिल्वा ने विकसित देशों पर आरोप लगाया है कि वे ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए की जाने वाली में समुचित और ठोस योगदान करने में नाकाम रहे हैं. रियो डी जनेरियो शहर में एक भाषण में राष्ट्रपति लूला ने कहा कि यह सही मौक़ा है कि विकसित देश ग्लोबल वार्मिंग के लिए ज़िम्मेदार गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए और ज़्यादा कार्रवाई करें. राष्ट्रपति लूला ने इसके साथ ही यह भी कहा कि विकसित देश ब्राज़ील के अमेज़न के जंगलों पर भाषण देना बंद करें. उन्होंने कहा कि विकसित देश ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर दोहरे मानदंड अपना रहे हैं. ब्राज़ीली राष्ट्रपति लूला ने पहले भी विकसित देशों पर पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस क़दम नहीं उठाने का आरोप लगाया है लेकिन इस तरह की भाषा उन्होंने शायद ही अपनाई है. उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने क्योटो जैसे संधियों और समझौतों के मसौदे तैयार करने में हमेशा चालाकी दिखाई है और ऐसा नज़र आता है कि जैसे वाक़ई वे ख़तरनाक गैसों का उत्सर्जन रोकने के लिए कुछ ठोस करने का इरादा रखते हैं जबकि असल में नतीजे इसके उलट ही निकले हैं. 'विश्व नेता' राष्ट्रपति लूला ख़ासतौर से जंगलों की कटाई के मुद्दे पर काफ़ी अड़ियल रुख़ में नज़र आए. उन्होंने कहा कि विकसित देशों को वनों के मुद्दे पर ब्राज़ील को सीख देने से बचना चाहिए क्योंकि उनके देश ने अपने अमेज़न जंगलों के क्षय को रोकने के लिए पिछले तीन साल में काफ़ी काम किया है. ब्राज़ीली राष्ट्रपति लूला ने कहा कि वह एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाएंगे जिसमें विकसित देशों को ख़तरनाक गैसों का उत्सर्जन कम करने के मुद्दे को उठाया जाएगा. लूला के इस बयान से एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून पर्यावरण मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में कहा था कि दुनिया के ग़रीब देशों को जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाना पड़ेगा जबकि ग़रीब देश ग्लोबल वार्मिंग के लिए काफ़ी कम हद तक ज़िम्मेदार हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बढ़ते पारे के लिए मानव ज़िम्मेदार02 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान बाध्यकारी प्रावधान स्वीकार नहीं:अमरीका03 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना मानवीय गतिविधियों से ही चढ़ा पारा01 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान जलवायु मुद्दे पर अन्नान की चेतावनी15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'जलवायु परिवर्तन पर रिपोर्ट आँखें खोलने वाली'30 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन से 'अफ़्रीका में संकट'29 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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