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बुश ने कहा कि इराक़ नीति बदलेगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का कहना है कि इराक़ के लिए दोनों देश नई नीति अपनाएँगे. दोनों नेताओं ने माना कि इराक़ में सब ठीक नहीं चल रहा है और इराक़ स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट के विश्लेषणों से सहमति जताते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि इराक़ नीति में परिवर्तन ज़रुरी है. हालांकि जॉर्ज बुश ने इस रिपोर्ट की कुछ अनुशंसाओं से अपने आपको अलग करने का प्रयास किया. जबकि टोनी ब्लेयर ने कहा कि यह रिपोर्ट आगे के लिए एक पुख्ता रास्ता सुझाती है. दोनों नेता व्हाइट हाउस में हुई चर्चा के बाद पत्रकारवार्ता में बोल रहे थे. दोनों नेताओं की यह महत्वपूर्ण बैठक इराक़ स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट आने के एक दिन बाद हुई है. हालांकि जॉर्ज बुश और टोनी ब्लेयर ने ईरान और सीरिया से फ़िलहाल इराक़ के मसले पर किसी बातचीत से इनकार किया है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान और सीरिया, इराक़ के भविष्य की किसी चर्चा में भागीदारी चाहते हैं तो उन्हें चरमपंथियों को सहायता बंद करनी होगी और इराक़ सरकार का समर्थन करना होगा. असहमति जॉर्ज बुश ने कहा, इराक़ में स्थिति ख़राब है. लेकिन उन्होंने कहा, "हमें सफल होना होगा और हम सफल होंगे." जबकि टोनी ब्लेयर ने कहा कि इराक़ स्टडी ग्रुप के विश्लेषण पर कोई विवाद नहीं है लेकिन सवाल यह है कि आगे बढ़ने का सही रास्ता क्या हो. उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में इराक़ की समस्या को लेकर ईरान और सीरिया से बातचीत करने की बात उठाई गई है.
टोनी ब्लेयर ने कहा कि ईरान इस समय इराक़ में विद्रोहियों को हथियार और धन मुहैया करवा रहा है. हालांकि उन्होंने ईरान से बातचीत से इनकार नहीं किया. लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रपति बुश के रवैये से प्रतीत हुआ कि जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम को छोड़ नहीं देता, उसके साथ कोई बात नहीं की जा सकती. स्टडी ग्रुप का कहना था कि परमाणु मुद्दे को अभी दरकिनार कर देना चाहिए लेकिन लगता है कि बुश इससे इनकार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "यदि वे चाहते हैं कि अमरीका से कोई बात हो तो उन्हें अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा." ऐसा लगता है कि जॉर्ज बुश इराक़ से सेना की वापसी के मुद्दे पर भी अपने पुराने रुख़ पर अड़े हुए हैं. स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट का सुझाव था कि फॉजों को 2008 तक वापस लौट आना चाहिए लेकिन राष्ट्रपति बुश का कहना था कि जब तक ज़मीनी परिस्थितियाँ अनुमति नहीं देतीं, ऐसा करना संभव नहीं होगा. एक ही मुद्दा था जिस पर दोनों नेताओं की सहमति थी, और वह थी मध्यपूर्व में दरार को पाटने की नए सिरे से कोशिश की ज़रुरत. टोनी ब्लेयर ने कहा कि वे जल्दी ही मध्यपूर्व की यात्रा पर जाने वाले हैं जहाँ वे इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच बातचीत को फिर से शुरु करने की कोशिश करेंगे. रिपोर्ट बुधवार को पेश हुई इराक़ स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में स्थिति बिगड़ रही है और समय भी हाथ से निकल रहा है.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अमरीकी सेना को हिंसका इलाक़ों में जाकर लड़ने के काम के बज़ाए इराक़ी सेना को प्रशिक्षण देना चाहिए. हालाँकि रिपोर्ट में अमरीकी सेना की वापसी के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है लेकिन ये ज़रूर कहा गया है कि सैनिक 2008 के शुरु में वापस आ सकते हैं. इराक़ स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट उसी दिन प्रकाशित हुई जिस दिन बतौर अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स के नाम की पुष्टि हुई. रॉबर्ट गेट्स ने ये स्वीकार किया है कि अमरीका इराक़ में नहीं जीत पा रहा और उन्होंने कहा है कि वे इराक़ को लेकर नए विचारों का स्वागत करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें कोई जादुई फ़ॉर्मूला नहीं है: इराक़ रिपोर्ट 06 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से लेंगे: बुश06 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना 'अमरीका इराक़ में नहीं जीत रहा'05 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना बग़दाद में हमले, 30 लोगों की मौत05 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ी ख़ुद समस्या का हल ढूँढें: शिया नेता04 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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