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'काम पूरा होने तक इराक़ में रहेगी सेना' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जॉर्डन में इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी से मुलाक़ात के बाद कहा है कि अमरीकी सेना अपना काम पूरा होने तक इराक़ में तैनात रहेगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जबतक इराक़ की सरकार को अमरीकी सेना की ज़रूरत महसूस होगी, अमरीकी सेना वहाँ रहेगी. उन्होंने इन बातों को भी सिरे से नकार दिया कि अमरीका इराक़ से निकल जाना चाहता है पर साथ ही कहा कि इराक़ी सेना के प्रशिक्षण के काम में तेज़ी लाने की ज़रूरत है. बुश ने बैठक के बाद कहा कि दोनों नेताओं के बीच काफी उपयोगी रही है. उन्होंने कहा कि मलिकी एक मज़बूत नेता हैं. इराक़ी सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण में तेज़ी लाने की ज़रूरत के बारे में बोलते हुए बुश ने कहा कि इराक़ी प्रधानमंत्री को देश की और सेनाओं को भी अपने नियंत्रण में रखना चाहिए ताकि चरमपंथी ताकतों और आत्मघाती दस्तों को रोका जा सके. बुश के मुताबिक इराक़ी प्रधानमंत्री ने उनसे बातचीत के दौरान कहा कि इराक़ में किसी भी तरह का विभाजन हिंसा को और बढ़ाने का ही काम करेगा. वहीं बैठक के बाद मलिकी ने कहा कि वो उन सभी लोगों का सहयोग करने के लिए तैयार हैं जो कि देश की राष्ट्रीय सरकार के साथ काम करने की इच्छा रखते हैं. उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ एक सम्मानजनक संबंधों को स्थापित करने की बात कही. साथ ही सुरक्षा पर एक नई नीति बनाने का वादा भी किया. इनकार इससे पहले बुधवार को नूरी अल मलिकी ने अमरीकी राष्ट्रपति से अपनी मुलाक़ात को बिना कोई कारण बताए रद्द कर दिया था. यह घटनाक्रम एक अमरीकी रिपोर्ट के लीक होने के बाद का है जिसमें इराक़ की हिंसा को काबू करने को लेकर मलिकी की क्षमताओं पर शंका ज़ाहिर की गई थी.
इसके अलावा इराक़ के एक शिया गुट ने बैठक से पहले धमकी दी थी कि यदि मलिकी और बुश की मुलाक़ात होती है तो वे मंत्रिमंडल और संसद से अलग हो जाएँगे. उल्लेखनीय है कि इराक़ी प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है जब इराक़ 2003 के बाद से अब तक की भीषण हिंसा झेल रहा है. मलिकी के बुधवार की मुलाक़ात को रद्द करने के निर्णय को इराक़ी शिया गुट के निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है. इराक़ी कैबिनेट में इस गुट के पाँच मंत्री हैं और संसद में इसके 30 सदस्य हैं. बातचीत से पहले अम्मान में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने कहा था कि बुश सार्वजनिक तौर पर तो मलिकी का समर्थन करेंगे लेकिन निजी बातचीत में शिया विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का दबाव बना सकते हैं. इस बीच इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ईरान की यात्रा पर हैं. उन्होंने ईरान से इराक़ की चुनी हुई सरकार को समर्थन देने का अनुरोध किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीकी मीडिया और बुश प्रशासन में ठनी29 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'शांति तभी जब अमरीका बाहर निकले'28 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ी राष्ट्रपति ने ईरान से मदद माँगी27 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ी राजनेताओं पर बरसे मलिकी26 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में मस्जिदों पर हमले, 53 की मौत24 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में हिंसा की अमरीका ने निंदा की24 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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