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शनिवार, 23 सितंबर, 2006 को 15:00 GMT तक के समाचार
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'ब्रितानी सेना की भूमिका सही'
ब्रिटिश सेना के प्रमुख जनरल रिचर्ड डेनेट
सेना प्रमुख ने कहा है कि ब्रितानी सैनिकों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है
ब्रिटिश सेना के प्रमुख जनरल सर रिचर्ड डेनेट ने अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ जारी अभियान में ब्रितानी सेना की भूमिका को सही ठहराया है.

अपनी सेना के पक्ष में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान में रॉयल एयर फ़ोर्स की भूमिका की आलोचना करने वाला ई-मेल 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना' है.

उन्होंने यह भी कहा कि पैराशूट रैजिमेंट के मेजर की ओर से की गई टिप्पणी 'दुर्भाग्यपूर्ण' हैं.

पिछले दिनों अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद में तैनात मेजर जेम्स लोडेन ने कहा था कि ब्रिटेन की रॉयल एयर फ़ोर्स 'पूरी तरह से बेकार' है. यह बात सामने तब आई जब यह ई-मेल मीडिया में लीक हो गया.

इस ई-मेल में यह भी कहा गया था कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात ब्रितानी सेना को और सैनिकों और उपकरणों की ज़रूरत है. ई-मेल में यह भी कहा गया था कि किस तरह रॉयल एयर फ़ोर्स सहयोग दे पाने में सक्षम नहीं.

मेजर ने यह भी आरोप लगाया था कि ब्रितानी सेना आधिकारिक रूप से जितने सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि कर रही है, दरअसल वह तादाद उससे कहीं ज़्यादा है.

आरोप निराधार

ब्रितानी सेना प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि घायल सैनिकों की संख्या के बारे में रक्षा मंत्रालय को ठीक से जानकारी है. लेकिन उन्होंने अगले सप्ताह तक अब तक की सारी जानकारी देने को कहा है.

 अफ़ग़ानिस्तान और ख़ासकर हेमलंद में बड़ी तादाद में ब्रितानी सेना और रॉयल एयर फ़ोर्स के बहादुर सैनिक तैनात हैं. इन्हें नौ सेना की ओर से भी कुछ सहयोग मिल रहा है.
जनरल सर रिचर्ड डेनेट, सेना प्रमुख, ब्रिटेन

उन्होंने कहा कि दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष कठिन और ख़तरनाक है. ऐसे में सफलता सामूहिक प्रयास पर निर्भर करती है.

हेमलंद में ब्रितानी सेना के बारे में उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान और ख़ासकर हेमलंद में बड़ी तादाद में ब्रितानी सेना और रॉयल एयर फ़ोर्स के बहादुर सैनिक तैनात हैं. इन्हें नौ सेना की ओर से भी कुछ सहयोग मिल रहा है."

सेना प्रमुख ने कहा कि अगर सैनिकों की मौत के बारे में ग़लत जानकारी लोगों को मिली होगी तो इसका कारण 'मुश्किल और भ्रम' की स्थिति रही होगी.

पिछले कुछ समय से दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेना तालेबान के ख़ात्मे के लिए एक बड़ा सैनिक अभियान चला रही है.

इस अभियान में लगे सैनिकों की तादाद को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है. अभियान में तैनात सैनिकों की तादाद बढ़ाने की माँग की गई थी जो लंबे समय से नज़रअंदाज़ की गई.

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