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फिर निशाने पर विदेश नीति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है ब्रितानी सरकार की विदेश नीति, मुसलमान समाज और घटनाक्रम का शिकार आम आदमी. पुलिस ने इस सप्ताह जब विमानों में उड़ान के दौरान विस्फोट की कथित साज़िश नाकाम करने और 20 से अधिक गिरफ़्तारियों का दावा किया, तो लोग घटना जानने के बाद यही सवाल करते दिखे कि गिरफ़्तार लोग किस समुदाय के हैं. पुलिस ने तो नाम ज़ाहिर नहीं किए मगर जब हिरासत में लिए गए लोगों के बैंक खाते सील करने के आदेश जारी हुए तो बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने उनके नाम अपनी वेबसाइट पर लगा दिए. स्पष्ट हो गया कि हिरासत में लिए गए लोग ब्रितानी मुसलमान हैं. सरकार अपनी ओर से हरसंभव कोशिश कर रही है कि इससे मुसलमान समुदाय में आक्रोश न हो, मगर विभिन्न अख़बारों और टेलीविज़न चैनलों पर इस तरह की कार्रवाई के विरुद्ध कुछ दबे और कुछ मुखर स्वर सुनाई पड़ने लगे हैं. ब्रितानी विदेश नीति निशाने पर है. उदारवादी मुसलमान भी कह रहे हैं कि फ़लस्तीन, अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और लेबनान से आ रही तस्वीरें युवा मुसलमानों को कट्टरपंथी रास्तों पर धकेल रही है. कुछ मुसलमान सांसद और इस्लामी गुट, छुट्टियाँ मना रहे ब्रितानी प्रधानमंत्री पर संसद का सत्र बुलाकर ब्रितानी विदेश नीति पर चर्चा के लिए दबाव भी बना रहे हैं. और सरकारी तंत्र ये उम्मीद लगाए है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों के विरुद्ध कुछ तो सबूत मिलें नहीं तो आगे चलकर ऐसी किसी भी कार्रवाई के प्रति लोगों और ख़ासकर मीडिया को आश्वस्त करना काफ़ी मुश्किल होगा. ********************************************************* गृह मंत्री बनाम उप प्रधानमंत्री गुरुवार को हुई इस कार्रवाई के दौरान चाहे वो मीडिया को ख़बरें देनी हों या आपातकालीन मामलों की समिति (कोबरा) की बैठक सारा नियंत्रण ब्रितानी गृह मंत्री जॉन रीड के हाथों में दिख रहा था.
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर इन दिनों कैरिबियाई द्वीपों पर छुट्टियाँ मना रहे हैं, ऐसे में देश की कमान है उप प्रधानमंत्री जॉन प्रेस्कॉट के हाथ में. टोनी ब्लेयर वहीं से फ़ोन करते रहे और यहाँ जॉन रीड की देख-रेख में बैठकें होती रहीं. बताया जा रहा है कि पिछले दिनों जॉन प्रेस्कॉट का नाम जिस तरह एक अमरीकी अरबपति से मुलाक़ात और उसके पहले अपनी सचिव के साथ संबंधों के चलते सुर्ख़ियों में रहा उसके बाद ब्लेयर नहीं चाहते थे कि संकट की इस घड़ी में नियंत्रण उनके हाथों में दिखे. मीडिया में ये बात काफ़ी प्रमुखता से उठी और उसके बाद रीड को स्पष्टीकरण तक देना पडा कि इसमें कोई नई बात नहीं है कि संकट के मौक़े पर कमान उनके हाथों में थी, मगर मतलब निकालने वालों ने तो अपने हिसाब से इसके अर्थ खोज लिए हैं. ********************************************************* काला गुरुवार? ब्रिटेन में लग रहा है गुरुवार और दहशत का रिश्ता सा हो गया है.
पिछले साल सात जुलाई यानी गुरुवार को परिवहन तंत्र को निशाना बनाते हुए बम विस्फोट हुए. उसके बाद 21 जुलाई को भी बम विस्फोट करने की कोशिश हुई, वो दिन भी गुरुवार ही था. इस साल एक और गुरुवार यानी 11 अगस्त की सुबह लोगों की आँखें हमले की कथित साज़िश के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई के बीच खुलीं. अब ये संयोग ही हो सकता है मगर आम लोगों के नज़रिए से शायद ऐसा दुर्योग जिसकी पुनरावृत्ति न हो, यही कामना करते लोग दिख रहे हैं. |
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