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संदिग्ध षडयंत्रकारियों से पूछताछ जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की पुलिस विमानों में बीच उड़ान के दौरान विस्फोट करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ़्तार लोगों से पूछताछ कर रही है. लंदन पुलिस को गिरफ़्तार किए गए 22 लोगों को बुधवार तक हिरासत में रखने की अनुमति मिल गई है. इस बीच हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति के बारे में सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी गई है. एक अन्य व्यक्ति को रिहा कर दिया गया है. ग़ौरतलब है कि ब्रिटिश पुलिस ने गुरुवार को कहा था कि अमरीका जाने वाले कम से कम दस विमानों को उड़ाने की एक बड़ी साज़िश को नाकाम कर दिया गया है. कार्रवाई गुरुवार को ही लंदन, बक्स और बर्मिंघम से पुलिस ने संदिग्ध षडयंत्रकारियों को गिरफ़्तार किया था. टेम्स वैली पुलिस ने तीन इंटरनेट कैफे पर छापेमारी कर वहाँ से कंप्यूटर उपकरणों को ज़ब्त कर लिया है. इनकी जाँच की जाएगी. ब्रिटेन के गृह मंत्री जॉन रीड ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ख़तरे का स्तर फिलहाल 'गंभीर' बना रहेगा. जॉन रीड ने कहा कि वो मानते हैं कि सभी प्रमुख संदिग्ध हिरासत में ले लिए गए हैं लेकिन वे इसकी गारंटी नहीं ले सकते. गिरफ़्तार किए गए 19 लोगों की संपत्ति सील कर दी गई है. बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने इन लोगों के नाम भी जारी किए हैं.
बैंक का कहना है कि वित्त मंत्रालय की ओर से लाइसेंस मिले बिना इनके पैसे जारी करना एक अपराध होगा. ब्रिटेन के उपप्रधानमंत्री जॉन प्रेस्कॉट ने संदिग्ध साजिश को नाकाम करने में सुरक्षा सेवाओं, पुलिस और विमानन कंपनियों की भूमिका की तहे दिल से प्रशंसा की है. अल-क़ायदा इस बीच पाकिस्तान में सुरक्षाबलों ने कथित साजिश के सिलसिले में पाकिस्तानी मूल के दो ब्रितानी लोगों को गिरफ़्तार किया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक विमानों में विस्फ़ोट करने की कथित साजिश का संबंध अल-क़ायदा से होने के संकेत मिले हैं. ब्रितानी गृह मंत्री जॉन रीड ने अपने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वो साजिश को नाकाम करने में सहयोग देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और ख़ास कर पाकिस्तान के 'ऐहसानमंद' हैं. अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी एफबीआई ने कहा है कि वो कुछ नई जानकारियों के आधार पर संदिग्ध साजिश के बारे में जाँच कर रही है. मुस्लिम समुदाय इस बीच ब्रिटेन में मुस्लिम समुदाय के 30 से अधिक संगठनों ने प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के नाम लिखे खुले पत्र में कहा है कि इराक़ और लेबनान पर ब्रितानी नीति से यहाँ के नागरिकों पर हमले का ख़तरा बढ़ रहा है. यह पत्र विज्ञापन के रुप में कई ब्रिटिश अख़बारों में प्रकाशित हुआ है. इसमें कहा गया है कि ब्लेयर सरकार की मौजूदा नीति चरमपंथियों को हथियार मुहैया कराने जैसा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ब्रिटेन में 'सर्वोच्च स्तर' की सतर्कता जारी11 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'षडयंत्रकारियों' के नाम जारी हुए11 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना धमाकों की साज़िश नाकाम करने का अभियान जारी11 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'कथित साज़िश' की ख़बरों से भरे अख़बार 11 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना चरमपंथियों से संघर्ष समाप्त नहीं हुआ: बुश11 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना 'विमानों में धमाकों की साज़िश नाकाम'10 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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