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इसराइल के दावे से अमरीका नाराज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता एडम ईरेली ने इसराइल के न्याय मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. इसराइली न्याय मंत्री हाएम रामोन ने गुरुवार को कहा था कि इस सप्ताह रोम में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसराइल को इस बात के लिए हरी झंडी मिल गई है कि वह लेबनान पर बमबारी जारी रखे. इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एडम ईरेली ने कहा, "संघर्ष का स्थायी हल निकालने के लिए अमरीका हरसंभव कोशिश कर रहा है." लेबनान पर इसराइल की बमबारी शुरू होने के बाद से अमरीका ने तुरंत युद्धविराम का समर्थन करने से इनकार कर दिया था. अमरीका का कहना था कि दीर्घकालिक युद्धविराम से ही लाभ हो सकता है. दूसरी ओर मलेशिया में मौजूद अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि वे बातचीत के लिए एक बार फिर मध्य-पूर्व का दौरा करेंगी. लेकिन उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई. इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से बातचीत के लिए वॉशिंगटन पहुँच गए हैं. प्रधानमंत्री ब्लेयर के एक प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति बुश से मुलाक़ात में तत्काल एक संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव लाने पर विचार होगा. उधर दक्षिणी लेबनान पर इसराइल का हमला जारी है. इसराइली सेना का कहना है कि रात में उन्होंने 130 ठिकानों पर बमबारी की. इसराइल का कहना है कि इनमें अधिकतर ठिकाने वो थे, जहाँ से हिज़्बुल्ला मिसाइल से हमले करता था. इसराइल के ताज़ा हमले में जॉर्डन के एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए. हिज़्बुल्ला ने भी उत्तरी इसराइल पर हमला किया है. हिज़्बुल्ला ने इस इलाक़े में कम से कम 70 रॉकेट दाग़े. इस हमले में क़रीब 20 लोग घायल हुए हैं. बुश-ब्लेयर मुलाक़ात ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मिलने वॉशिंगटन जा रहे हैं. दोनों नेता मुख्य रुप से लेबनान में हिज़्बुल्ला पर इसराइली हमलों से उपजी स्थिति पर चर्चा करेंगे और इस समस्या का हल तलाशने की कोशिश करेंगे. लेबनान के मुद्दे पर अमरीका का साथ देने के लिए टोनी ब्लेयर को विरोध का सामना करना पड़ रहा है. टोनी ब्लेयर को इस बात के लिए भी निंदा का सामना करना पड़ा है कि उन्होंने तत्काल युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. अमरीका लेबनान की स्थिति के लिए हिज़्बुल्ला और उसके समर्थकों को दोषी ठहराता रहा है. उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन के अख़बारों ने फिर से युद्ध विराम की लोगों की माँग को रेखांकित किया है वहीं राहत एजेंसियाँ और प्रमुख व्यक्ति इसकी माँग करते रहे हैं. इस बीच इसराइली हमलों की वजह से सैकड़ों लेबनानी नागरिकों को अपने ठिकाने छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है. मंगलवार को इसराइली हवाई हमले में संयुक्त राष्ट्र के चार पर्यवेक्षकों के मारे जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इससे गहरा सदमा पहुँचा है. उल्लेखनीय है कि अमरीका की आपत्ति के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षापरिषद में इस घटना को लेकर निंदा प्रस्ताव नहीं रखा जा सका था. वैसे इसराइल इस घटना के लिए खेद जता चुका है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इसराइली बमबारी में 600 मारे गए'27 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना लेबनान से सैनिक हटाएगा ऑस्ट्रेलिया27 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना अन्नान का तुरंत युद्धविराम का आग्रह26 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइली हमलों में पर्यवेक्षकों की मौत25 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइल शांतिबलों की तैनाती पर सहमत24 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइल को अमरीकी बमों की खेप22 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इसराइली बल प्रयोग के क़ानूनी पहलू20 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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