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कूफ़ा में कार बम धमाका, 54 की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अधिकारियों का कहना है कि कूफ़ा शहर में हुए कार बम धमाके में 54 लोग मारे गए हैं. धमाके में 100 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बम धमाका एक शिया मस्ज़िद के निकट हुआ. जहाँ बड़ी संख्या में मज़दूर काम की तलाश में इकट्ठा हुए थे. धमाके में घायल हुए नसीर कदीम ने बताया कि एक गाड़ी वहाँ आकर रुकी, तो ये सोचकर मज़दूर वहाँ पहुँच गए कि शायद उन्हें काम मिलेगा. लेकिन तभी उसमें ज़ोरदार धमाका हो गया. घटना के बाद पुलिसकर्मियों के वहाँ पहुँचने पर लोगों ने उन पर पथराव किया. पुलिस को हवा में गोलियाँ चलानी पड़ी. गढ़ ये धमाका एक शिया मस्ज़िद के पास हुआ. सुनहरे गुंबद वाले इस मस्ज़िद को शियाओं का पवित्र स्थल माना जाता है. कूफ़ा शहर शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र का गढ़ माना जाता है. मुक़्तदा अल सद्र की मेहदी सेना पर सुन्नियों के ख़िलाफ़ हमले का आरोप लगता रहा है. सोमवार को ही महमूदिया शहर में हमले में कम से कम 48 लोग मारे गए थे और 60 से ज़्यादा घायल हुए थे. माना जाता है कि महमूदिया में भी मारे गए ज़्यादातर लोग शिया मुसलमान थे. बग़दाद स्थित बीबीसी संवाददाता एडम ब्रूक्स का कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे मक़सद शिया-सुन्नी तनाव को बढ़ाना है. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ी ओलंपिक समिति के प्रमुख अगवा15 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना इराक़ युद्ध पर ख़र्च-300 अरब डॉलर14 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन का मुक़दमा अंतिम दौर में10 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी सैनिकों पर बलात्कार का आरोप09 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना ब़गदाद में संघर्ष, 60 से अधिक मौतें09 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना बग़दाद में बम हमले और गोलीबारी07 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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