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बुश ने हंगरी और इराक़ की तुलना की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि इराक़ के लोग हंगरी में 50 साल पहले हुए जनविद्रोह से सीख ले सकते हैं. हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में बुश ने कहा कि इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी उसी लोकतांत्रिक आदर्शों से प्रेरित हैं जिसने 1956 के विद्रोह और 1989 में साम्यवाद के ख़ात्मे के दौरान हंगरी के देशभक्तों को प्रेरणा दी. बुश साम्यवादी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 50वीं सालगिरह पर आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए गुरुवार को हंगरी में थे. वह सोवियत प्रभुत्व के ख़िलाफ़ उठ खड़ा होने वाले विद्रोहियों श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए बुडापेस्ट के कोशूट स्क़्वायर स्थित स्मारक पर भी गए. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के पिता ने भी 1989 में हंगरी यात्रा पर आए पहले अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में कोशूट स्क़्वायर में हंगरी की जनता को संबोधित किया था. महत्व यों तो 1956 के विद्रोह को सोवियत सेना ने कुचल दिया था, लेकिन एक दमनकारी शासन के ख़िलाफ़ जनविद्रोह की उस घटना का प्रतीकात्मक महत्व रहा है. हालाँकि हंगरीवासियों का कहना है कि 1956 के विद्रोह को किसी भी तरह की बाहरी सहायता नहीं मिली थी. इतना ही नहीं कुछ संगठनों का तो यहाँ तक कहना है कि 50 साल पहले अमरीका ने हंगरी की जनता का साथ नहीं दिया था, इसलिए बुश को माफ़ी माँगनी चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश ग्वांतानामो शिविर बंद करना चाहते हैं21 जून, 2006 | पहला पन्ना राष्ट्रपति बुश ने ईरान को दी चेतावनी19 जून, 2006 | पहला पन्ना बुश ने अचानक इराक़ का दौरा किया13 जून, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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