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शुक्रवार, 16 जून, 2006 को 19:39 GMT तक के समाचार
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रूस ने पाइपलाइन बनाने की पेशकश की

गैस पाइपलाइन
रूस ने अब भारत-ईरान गैस पाइपलाइन के निर्माण में दिलचस्पी दिखाई है
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूसी तेल कंपनी गैज़प्रॉम ईरान से भारत तक जाने वाली गैस पाइपलाइन बनाने को तैयार है.

अमरीका पहले ही पाकिस्तान के रास्ते आनेवाली 2,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के प्रति अपना विरोध जता चुका है और ऐसे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ये बयान काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

रूस के राष्ट्रपति ने ये बात शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गनाइज़ेशन की शिखर बैठक में कही है जिसका भारत भी सदस्य है.

बीबीसी से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय तेल पत्रिका 'अपस्ट्रीम' के संपादक नरेंद्र तनेजा ने बताया कि आधिकारिक सूत्र कह रहे हैं कि भारत सरकार को गैज़प्रॉम का ये प्रस्ताव मिल भी चुका है, लेकिन भारत इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है.

इस संदर्भ में राष्ट्रपति पुतिन ने भी माना है कि ये प्रस्ताव अभी शुरुआती है और इस पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई है.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि जिस शंघाई कॉर्पोरेशन की बैठक में राष्ट्रपति पुतिन ने ये बातें कहीं हैं वहाँ चीन के राष्ट्रपति और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी मौजूद हैं.

भारत का रुख़

लेकिन भारत के प्रधानमंत्री वहाँ नहीं गए और भारत ने इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को भेजा है.

अपस्ट्रीम के संपादक नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि भारत अभी ये भी देखना चाहता है कि पुतिन और गैज़प्रॉम अपने इस प्रस्ताव को लेकर कितने गंभीर हैं.

 कहा जाता है कि तेल कंपनी गैज़प्रॉम रूस के विदेश मंत्रालय, रक्षा और वित्त मंत्रालय से भी ज़्यादा ताकतवर है
नरेश तनेजा, संपादक अपस्ट्रीम

व्यापार मामलों की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फ़ोर्ब्स कहती है कि रूस यूँ भी लगातार ईरान से क़रीबी सामरिक और राजनीतिक रिश्ते बनाए हुए है.

पिछले एक साल से तेल के जानकारों के बीच ये अटकलें भी जारी हैं कि रूस के राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा होने पर रूस के सबसे प्रभावी तेल कंपनी गैज़प्रॉम का अध्यक्ष बनना चाहते हैं.

दरअसल, रूस के संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो बार से ज़्यादा बार राष्ट्रपति नहीं बन सकता.

अपस्ट्रीम पत्रिका के नरेंद्र तनेजा कहते हैं, “कहा जाता है कि तेल कंपनी गैज़प्रॉम रूस के विदेश मंत्रालय, रक्षा और वित्त मंत्रालय से भी ज़्यादा ताकतवर है.

ऐसे में अगर पुतिन गैज़प्रॉम के प्रमुख बनना चाहें तो उन्हें कई मित्र देशों से भी समर्थन मिलेगा, ख़ासकर उनसे जो ये नहीं चाहते कि अमरीका दुनिया का एकमात्र ताकतवर ध्रुव बना रहे.

अपने कार्यकाल में राष्ट्रपति पुतिन ने कई ऐसे क़दम उठाए हैं जिनसे गैज़प्रॉम बहुत ताकतवर हुई है.

जानकारों का कहना है कि तेल का खेल बड़ा है और भारत इस समय भले ही अमरीका के क़रीब जा रहा हो. लेकिन साथ ही वह रूस और चीन के साथ भी संतुलन बनाने की कोशिश करेगा.

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