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कारतूस से अटा पड़ा है बग़दाद का बाज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ भले ही संकट के दौर से गुज़र रहा हो और लोगों को रोज़मर्रा की ढेर सारी दिक्क़तें हों लेकिन अगर कारतूस चाहिए तो वो इराक़ में आसानी से और बेहिसाब उपलब्ध है. सात से बीस रुपए प्रति कारतूस की दर से चाहे जितना कारतूस बग़दाद के काले बाज़ार से ख़रीदा जा सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कारतूसों के बाज़ार पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण न होने के कारण इन दिनों आयुध बाज़ार में भारी मात्रा में कारतूस उपलब्ध हैं. ब्रिटेन की एक संस्था ऑक्सफ़ैम के शोधों पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दिनों इराक़ की राजधानी कारतूसों से पटी पड़ी है. इनमें से अधिकतर कारतूस पूर्वी यूरोप और रूस के आयुध कारखानों में तैयार किए हुए हैं. रिपोर्ट बताती है कि ये कारतूस या तो तस्करी से आ रहे हैं या फिर अमरीकी नेतृत्व वाली संयुक्त सेना ने जो कारतूस इराक़ी सेना के लिए मँगाए हैं उसमें से चोरी-छिपे बिक रहे हैं. इनमें से कुछ कारतूस तो 20 वर्ष पुराने भी हैं पर अधिकतर कारतूस नए हैं और वर्ष 1999 से 2004 के बीच तैयार किए गए हैं. कारतूस के आँकड़े ऑक्सफ़ैम की निदेशक बारबरा स्टॉकिंग ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया, "बग़दाद के काले बाज़ार में नए कारतूस भारी मात्रा में उपलब्ध हैं." इनमें से अधिकतर कारतूसों के लिए बताया जाता है कि इन्हें वर्ष 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद तैयार किया गया है. अधिकतर कारतूस चेक गणराज्य, सर्बिया, रोमानिया और रूस में तैयार किए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय आयुध बाज़ार पर कोई नियंत्रण न होने और कमज़ोर सुरक्षा इंतज़ामों के कारण लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर भी उच्च गुणवत्ता वाले हथियार मिल पा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिवर्ष 14 अरब कारतूस तैयार किए जाते हैं पर इस बाबत बहुत कम आकड़े उपलब्ध हैं कि ये कारतूस किसने ख़रीदे और इनका किस तरह इस्तेमाल किया गया. कारतूसों के निर्यात से बारे में केवल 17 प्रतिशत आँकड़े उपलब्ध हैं. बग़दाद का बाज़ार बग़दाद के काले बाज़ार में एके-47 राइफ़ल के एक कारतूस की क़ीमत सात रूपए से 20 रूपए तक है. इन कारतूसों का दाम इस बात पर निर्भर करता है कि ये किस कंपनी ने तैयार किए हैं और ये कितने पुराने हैं.
हाल के इस बाज़ार भाव के हिसाब से देखें तो बग़दाद में एक व्यक्ति की जान लेने की क़ीमत क़रीब 110 रूपए है. चिकित्सा सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय में जो लोग गोलियों का निशाना बने हैं, उन्हें चार से 12 गोलियां मारी गई हैं. ऑक्सफ़ैम की रिपोर्ट के मुताबिक क़रीब 76 देशों में इन छोटी आयुध सामग्री तैयार की जाती है जिनकी वैश्विक बाज़ार में क़ीमत तक़रीबन 90 से 135 अरब रूपए होती है. आकडों के अनुसार प्रतिवर्ष 10-14 अरब कारतूस तैयार होते हैं या यूँ भी कहा जा सकता है कि रोज़ औसत 330 लाख कारतूस बनते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ में हथियारों पर नियंत्रण27 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन और सऊदी अरब में रक्षा सौदा22 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना ब्राज़ील में हथियारों की बिक्री जारी रहेगी23 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना आईआरए के हथियार बेकार किए गए26 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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