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कुछ इलाक़ों में सहायता पहुँचने में मुश्किलें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया में शनिवार को आए भूकंप से प्रभावितों की मदद के लिए खुले मैदानों में चार अंतरराष्ट्रीय अस्पताल बनाए गए हैं. ग़ौरतलब है कि 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप से अभी तक मारे गए लोगों की संख्या पाँच हज़ार 800 के आसपास हो गई है. हज़ारों लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं और लगभग दो लाख लोग बेघर हो गए हैं. दुनिया भर से सहायता सामग्री पहुँचनी शुरू हो गई है और लगभग 22 देश राहत कार्यों में मदद कर रहे हैं. डॉक्टर यह भी जाँच-पड़ताल कर रहे हैं कि गंदे पानी और गंदगी से पैदा होने वाली बीमारियों के कोई लक्षण तो नहीं हैं. अधिकारियों का कहना है कि तीन रातें खुले आसमान के नीचे बिताने के बाद इंडोनेशिया में भूकंप पीड़ितों तक सहायता पहुँचनी शुरु हो गई है. हालाँकि भूकंप प्रभावित इलाक़े में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहाँ पीड़ितों के लिए अभी तक अधिकारियों की तरफ़ से कोई सहायता नहीं पहुँची है. बहुत से प्रभावितों को चौथी रात भी बिना छत के गुज़ारनी पड़ा क्योंकि सड़कें ख़राब हो जाने से कुछ दूरदराज़ के इलाक़ों तक सहायता पहुँचाने में बड़ी परेशानी आ रही है. संयुक्त राष्ट्र और रेडक्रॉस ने जेनेवा में एक बैठक करके राहत कार्यों में समन्वय बनाने पर चर्चा की है. भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित योग्याकार्ता इलाक़े में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों को साफ़ पानी और रहने के लिए स्थान मुहैया कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें भूकंप पीड़ितों तक सहायता पहुँचनी शुरु30 मई, 2006 | पहला पन्ना भूकंप का आँखों देखा हाल27 मई, 2006 | पहला पन्ना मलबे में फसे लोगों को बचाने की कोशिश जारी28 मई, 2006 | पहला पन्ना खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं लोग28 मई, 2006 | पहला पन्ना बारिश ने बढ़ाई भूकंप पीड़ितों की दिक्कतें29 मई, 2006 | पहला पन्ना राहत कार्य बड़ी चुनौती-संयुक्त राष्ट्र29 मई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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