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बारिश ने बढ़ाई भूकंप पीड़ितों की दिक्कतें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया में शनिवार को आए विनाशकारी भूकंप से प्रभावित हज़ारों लोगों ने लगातार दूसरी रात खुले आसमान के नीचे बिताई. हालात पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र एजंसियाँ जिनेवा में मिल रही हैं. इधर बारिश ने भूकंप प्रभावित लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है. कुछ लोगों को बारिश से बचने के लिए अपने मकान के मलबे में रहने के लिए वापस लौटना पड़ा. जावा द्वीप में आए भूकंप में 4900 से अधिक लोग मारे गए हैं और 20 हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं. घायलों की बड़ी संख्या होने के कारण स्थानीय अस्पताल इनसे भरे हुए हैं. हालांकि राहत और बचाव कार्य ज़ोरों से चल रहा है लेकिन बचाव दलों का कहना है कि अब मलबे में लोगों के जिंदा बचने की कम संभावना है. देश के कई हिस्सों से राहत टीमें जावा द्वीप पहुँची हैं. साथ ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ भी राहत कार्य के लिए लोगों को भेज रही हैं. जावा से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि स्थानीय अस्पतालों की हालत बहुत ख़राब है क्योंकि उनके पास कर्मचारी कम हैं. कार पार्क और सड़कों पर भी घायलों का इलाज चल रहा है. प्रभावित इलाक़े जावा द्वीप के प्राचीन शहर योग्यकर्ता के दक्षिण के गाँव भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. बंतुल शहर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है जहाँ क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए हैं.
जावा का मुख्य हवाई अड्डा अब खुल गया है. लेकिन सिर्फ़ चिकित्सा सहायता के लिए. भूकंप प्रभावित इलाक़ों में सिंगापुर और मलेशिया की सेना इंडोनेशियाई सैनिकों की सहायता के लिए मौजूद हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंडोनेशिया की सहायता के लिए घोषणाएँ हो रही हैं. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस समय आवश्यकता ज़्यादा से ज़्यादा राहतकर्मियों और राहत उपकरणों की है. अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी रेड क्रॉस का कहना है कि शनिवार सुबह को आए भूकंप के बाद क़रीब दो लाख लोग इस इलाक़े से अपना घर छोड़कर चले गए हैं. योग्यकर्ता इंडोनेशिया का पुराना शहर है और एक समय यह शाही राजधानी भी था. राजधानी जकार्ता से दक्षिणपूर्व स्थित यह शहर इंडोनेशिया के बड़े शहरों में से एक है. दिसंबर 2004 में इंडोनेशिया के तटीय इलाक़े में आए भूकंप के कारण हिंद महासागर में सूनामी आ गई थी और बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे. |
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