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सद्दाम के ख़िलाफ़ औपचारिक आरोप तय | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के मुक़दमे की सुनवाई के दौरान उनके ख़िलाफ़ औपचारिक तौर पर आरोप तय किए गए हैं. जब बग़दाद में अदालत में जज ने सद्दाम हुसैन से पूछा कि क्या वे दोषी हैं या नहीं तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. सद्दाम हुसैन ने कहा," क्या यह तरीक़ा है इराक़ के राष्ट्रपति के साथ व्यवहार करने का? मैं हाँ या न कुछ नहीं कहूँगा." इसके बाद जज ने निर्देश दिए कि अदालत में लिखा जाए कि सद्दाम हुसैन ने आरोपों से इनकार किया है और फिर जज ने दूसरे अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप पढ़ने शुरू कर दिए. सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने 1982 में दुजैल में शिया मुस्लिमों की हत्या के सिलसिले में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ आरोप पढ़े. आरोप सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ इराक़ के दुजैल में 148 शिया मुस्लिमों की हत्या में कथित भूमिका निभाने के आरोप लगे थे. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि अदालत में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ 148 के बजाय केवल नौ लोगों की हत्या का मामला तय हुआ है. सुनवाई के दौरन सद्दाम हुसैन ने कहा, "आप सद्दाम हुसैन के समक्ष हैं, इराक़ के राष्ट्रपति के समक्ष, मैं इराक़ी लोगों की इच्छा से राष्ट्रपति बना हूँ और मैं अब भी राष्ट्रपति हूँ." सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ ये आरोप भी है कि 1982 में उन पर विफल जानलेवा हमले के बाद, उन्होंने 399 लोगों को गिरफ़्तार करवाया और महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित किया गया. जब सद्दाम हुसैन और उनके सहअभियुक्त उनके ख़िलाफ़ लगे सभी आरोपों को विस्तार से पढ़ लेंगे, तो बचाव पक्ष अपना केस शुरू करेगा और गवाहों को पेश करेगा. मुक़दमा समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक इराक़ के नियमों के तहत पहले अभियोजन पक्ष अपने मामले के बारे में बताता है, उसके बाद जज आरोपों के बारे में फ़ैसला लेते हैं और उसके बाद बचाव पक्ष अपना मामला शुरू करता है. सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमा पिछले अक्तूबर में शुरू हुआ था और कई बार इसकी सुनवाई स्थिगत हुई. मुक़दमे के दौरान सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ सुबूत जुटाने पर ज़ोर रहा. अब बचाव पक्ष की बारी है कि वो सद्दाम हुसैन और उनके सहअभियुक्तों का मामला पेश करे. इस दौरान बचाव पक्ष के गवाहों को कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा और कुछ गवाह पर्दे के पीछे रहकर भी अपनी गवाही दे सकते हैं. अगर सद्दाम हुसैन दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें मौत की सज़ा हो सकती है. |
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