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मंगलवार, 11 अप्रैल, 2006 को 14:36 GMT तक के समाचार
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प्रोदी के लिए राह आसान नहीं होगी
प्रोदी
प्रोदी की राह आसान नहीं होगी
अपने समर्थकों के सामने रोमानो प्रोदी ने अपनी जीत की घोषणा की और नयी शुरुआत का संकल्प किया. प्रोदी ने विश्वास व्यक्त किया की उनका गठबंधन पाँच सालों तक सरकार चलाएगा.

बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार रोमानो प्रोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन को जितने कम अंतर से जीत मिली है उससे गठबंधन के कई समर्थकों को तो निराशा हुई ही है लेकिन शेष यूरोप में शायद कई लोगों ने सिल्वियो बर्लुस्कोनी की हार के बाद राहत की सांस भी ली होगी.

अनेक लोगों को लगता था कि कई बार अपने अटपटे बर्ताव, व्यापारिक हित और अपनी मीडिया कंपनियों की मदद से वो इटली की राजनीति पर ग़लत प्रभाव छोड़ रहे थे. दूसरी ओर बर्लुस्कोनी इटली की राजनीतिक समस्याओं का हल ढूंढने में भी विफल हो रहे थे.

लेकिन रोमानो प्रोदी के लिए आगे राह मुश्किल है. सबसे पहले उन्हें संसद के ऊपरी सदन यानि सेनेट में बहुमत हासिल करना होगा. बर्लुस्कोनी के कार्यकाल में लागू की गई चुनाव प्रणाली पेचिदा है और सीटों की अंतिम संख्या तय कर पाने में दिक्कतें आएंगी. और आख़री फ़ैसला उन चंद सांसदों पर निर्भर करेगा जिनका चुनाव विदेशों में रहने वाले इतालवी लोग करते हैं.

अगर यहां तक सब कुछ ठीक चला तो अगले महीने रोमानो प्रोदी को अपना बहुमत साबित करना पड़ेगा जब उन्हें संसद में प्रधानमंत्री चुना जाना है.

चुनाव के बाद बर्लुस्कोनी

सिलवियो बर्लुस्कोनी ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जितनी संभव हो सके मज़बूत चुनौती पेश करने की कोशिश की थी. उनकी सबसे महत्वपूर्ण रणनीति यह थी कि मतदाताओं को यह कह कर डराया जाए कि अगर वामपंथी सत्ता में आते हैं तो साम्यवादी प्रभाव बढ़ेगा, टैक्स बढेंगे.

बर्लुस्कोनी का इटली की मीडिया पर पूरा नियंत्रण है

अपनी हार के बावजूद बर्लुस्कोनी मध्य से दक्षिण की ओर झुकाव रखने वाले गठबंधन के नेता बने हुए हैं और वो रोमानो प्रोदी की सरकार गिराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

अगर मध्यमार्गी-वामपंथी गठबंधन सरकार बना लेता है तो उसके सामने अंदरूनी मतभेदों का ख़तरा भी होगा. वहीं इस सरकार को इटली के कर्ज़ कम करने के लिए सार्वजानिक खर्च में कटौती और टैक्स बढ़ाने पड़ सकते हैं.

यह गठबंधन ऐसे कड़े कानून भी ला सकता है जो राजनीतिज्ञों के व्यापार हितों को नियंत्रित करें जिससे बर्लुस्कोनी को राजनीति से ही बाहर होना पड़ जाए.

फ़िलहाल लगता है कि बर्लुस्कोनी इतनी मज़बूत स्थिति में हैं कि ऐसे किसी कानून को पारित होने से रोक सकें. लेकिन बर्लुस्कोनी के ख़िलाफ़ रिश्वतखोरी का मामला भी जांच के अधीन है और इसमें नया मुकदमा शुरु हो सकता है. और जहां तक इटली के आर्थिक सुधारों का प्रश्न है किसी भी कमज़ोर सरकार के लिए उसे लागू कर पाना मुश्किल होगा.

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