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तालाबानी ने 'प्रताड़ना' की निंदा की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने अबू ग़रेब जेल की कुछ और तस्वीरें आने के बाद गठबंधन सैनिकों के हाथों क़ैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव और प्रताड़ना की निंदा की है. तालाबानी ने कहा है कि सरकार के लिए यह अचंभे की बात है कि एक सभ्य देश अपने सैनिकों को ऐसी घृणित कार्रवाई करने की इजाज़त देता है. उन्होंने माँग की कि इस तरह के अमानवीय बर्ताव के लिए ज़िम्मेदारों को सज़ा दी जानी चाहिए. इराक़ी प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने भी अबू ग़रेब जेल के क़ैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव की निंदा की है लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि ये मामले 2003 में हुए थे और इन मामलों में पहले से ही अनेक लोगों को दंडित किया जा चुका है. अमरीका ने 2004 में इसी तरह की तस्वीरें जारी होने के बाद अनेक सैनिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी. इराक़ सरकार देश में विदेशी गठबंधन सेनाओं की मौजूदगी को लेकर कड़े विरोध का सामना कर रही है और बग़दाद में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मंत्रियों को आशंका है कि क़ैदियों को नंगा दिखाने वाली और रक्तरंजित ताज़ा तस्वीरों से मामला और बिगड़ सकता है. उधर अमरीका के मानवाधिकार संगठनों ने अबू ग़रेब में क़ैदियों की दुर्दशा की नई तस्वीरें आने के बाद इस सारे मामले की जाँच की मांग की है. कार्यकर्ताओं ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि इन नए चित्रों के सामने आने के बाद सरकार जेलों की नीति निर्धारण करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सख़्ती बरतने को प्रेरित होगी. नाराज़गी अमरीका ने एक ऑस्ट्रेलियाई टीवी चैनल पर इराक़ की अबू ग़रेब जेल में कैदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें दिखाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इसे प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए था.
अमरीकी रक्षा विभाग ने कहा है कि इन तस्वीरों से 'अनावश्यक रूप से हिंसा को बढ़ावा मिलेगा.' अधिकारियों का कहना है कि इन दुर्व्यवहार के लिए दोषी सैनिकों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है. उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलियाई टेलीविज़न सीबीएस ने वर्ष 2003 में अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों को यातनाएँ दिए जाने की वो तस्वीरें प्रसारित की हैं जिन्हें अब तक प्रसारित नहीं किया गया था. उधर टेलीविज़न चैनल ने तस्वीरें दिखाने के अपने फ़ैसले को सही ठहराया है. ये तस्वीरें ऐसे समय में सामने आई हैं जबकि मुसलमानों और पश्चिमी देशों के बीच पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों को लेकर तनाव अपने चरम पर पहुँच रहा है. एसबीएस का कहना है, "इन तस्वीरों में हत्या, प्रताड़ना और यौन दुर्व्यवहार साफ़ देखा जा सकता है." बुधवार को एसबीएस के कार्यक्रम 'डेटलाइन' में दिखाया गया था कि अमरीकी सैनिक क़ैदियों को कैमरे के सामने हस्तमैथुन करने के लिए बाध्य कर रहे हैं. एक अन्य वीडियो में दिखाया गया है कि एक परेशान क़ैदी अपना सिर दीवार से टकरा रहा है. |
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