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जापानी शाही परिवार में लड़का या लड़की!
जापानी राजकुमारी मसाको और उनकी बेटी आइको
शाही परिवार में 1965 के बाद से कोई लड़का पैदा नहीं हुआ है
जापान के शाही परिवार के परंपरावादी लोग सदस्य फूले नहीं समा रहे हैं और उनकी ख़ुशी की वजह ये है कि सम्राट के दूसरे बेटे की पत्नी काइको गर्भवती हैं.

लेकिन उत्सुकता की बात ये है कि अगर सम्राट के दूसरे बेटे की पत्नी गर्भवती हैं तो इसमें असाधारण बात क्या है? असाधारण बात ये है कि कुछ लोगों अब यह उम्मीद जागी है कि हो सकता है कि इस बार शाही परिवार में दशकों बाद कोई लड़का जन्म ले ले.

जापान में क़रीब चार महीने से यह बहस चल रही है कि क्या शाही परिवार क़ानून में संशोधन किया जाना चाहिए जिसमें प्रावधान है कि सिर्फ़ पुरुष ही राजगद्दी पर बैठ सकते हैं ताकि महिलाओं को भी राजगद्दी पर बैठने का रास्ता साफ़ हो सके.

लेकिन शाही परिवार में 1965 से कोई लड़का पैदा नहीं हुआ है जिससे यह माँग उठने लगी है कि शाही परिवार क़ानून में संशोधन करके महिलाओं को भी राजगद्दी पर बैठने की इजाज़त दे देनी चाहिए.

लेकिन अब 39 वर्षीय प्रिंसेस काइको के गर्भवती होने की ख़बर ने एक बार फिर इन अटकलों को जन्म दे दिया है कि हो सकता है कि किको अगर लड़के को जन्म दे देंगी तो क़ानून में संशोधन करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

प्रधानमंत्री जूनीशीरो कोईज़ूमी ने शाही परिवार क़ानून में संशोधन की बात आगे बढ़ाई थी, अब वह भी सतर्क नज़र आते हैं.

कोईज़ूमी ने बुधवार को कहा था, "वांछनीय तो ये होगा कि क़ानून में संशोधन तब किया जाए जब सभी इसका समर्थन कर सकें."

उनसे अलग राय रखने वाले कहते हैं कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री अब उन परंपरावादी ताक़तों से नहीं भिड़ना चाहते जो महिलाओं के राजगद्दी पर बैठने का विरोध करती हैं.

ख़बर फैली

ऐसे में शाही परिवार की दूसरी बहू काइको के गर्भवती होने की ख़बरें शायद किसी शाही सदस्य ने ही सार्वजनिक की हैं, हालाँकि गर्भ अभी शुरुआती स्थिति में ही है.

शाही परिवार की दूसरी बहू काइको
काइको के गर्भवती होने की ख़बरे तेज़ी से फैली

इससे यही लगता है कि शाही परिवार क़ानून में संशोधन के मुद्दे पर बहस को कमज़ोर करने के इरादे से शायद यह ख़बर सार्वजनिक की गई.

ख़बरों में कहा गया है कि राजकुमारी किको छह या सात सप्ताह की गर्भवती हैं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग का पता लगाने के लिए अभी दस सप्ताह का समय लग सकता है.

और वो समय होगा अप्रैल महीने का अंत जबकि संसद का सत्र जून में समाप्त होगा यानी क़ानून पर तब भी बहस हो रही होगी.

अगर गर्भ में पलने वाला बच्चा लड़का होगा तो क़ानून में संशोधन करने की माँग धूमिल पड़ जाएगा लेकिन अगर लड़की हुई तो कोईज़ूमी क़ानून में संशोधन की बात को आगे बढ़ाने में सक्षम होंगे. शायद तब तक वह कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहते.

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