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'इराक़ हमले का फ़ैसला पहले ही हो गया' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दावा किया गया है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने संयुक्त राष्ट्र की सहमति की परवाह किया बिना, पहले ही इराक़ पर हमला करने के बारे में अनौपचारिक तौर पर फ़ैसला कर लिया था. ये दावा मानवाधिकार मामलों के एक वकील और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंडन में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के प्रोफ़ेसर फ़िलिप सैंड्स ने एक पुस्तक में किया है. इस किताब का नाम है 'लॉलेस वर्ल्ड.' उन्होंने इराक़ पर हमले से दो महीने पहले दोनो नेताओं के बीच 31 जनवरी 2003 में व्हाइट हाऊस में हुई बैठक के तथाकथित आधिकारिक विवरण को अपने दावे का आधार बनाया है. इसके अनुसार राष्ट्रपति बुश ये वादा कर रहे हैं कि वे संयुक्त राष्ट्र की स्वीकृति लेने की कोशिश करेंगे लेकिन 'सैन्य कार्रवाई तो होगी ही.' ये भी दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ब्लेयर ने राष्ट्रपति बुश से कहा कि वे पूरी तरह से अमरीकी योजना का समर्थन करते हैं. प्रधानमंत्री ब्लेयर के दफ़्तर का कहना है कि वे उस बात पर कायम हैं कि सैन्य कार्रवाई तभी हुई जब अन्य सब विकल्प ख़त्म हो गए. साथ ही प्रधानमंत्री ब्लेयर के दफ़्तर का कहना था कि वह प्रधानमंत्री और अन्य विश्व नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत पर टिप्पणी नहीं करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें कुछ हल्कों में कड़ी आलोचना05 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'लंदन हमलों के लिए इराक़ कारण नहीं'27 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना केवल सुरक्षा प्रबंध ही काफ़ी नहीं-ब्लेयर09 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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