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फ़लस्तीनी चुनाव: सवाल-जवाब | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव को लेकर कई तरह के सवाल उठते आएँ हैं. पहले संसदीय चुनाव 1996 में हुए थे लेकिन उसके बाद चुनाव लगातार टलते आ रहे हैं. आख़िरी बार इन चुनावों के लिए जुलाई 2005 की तारीख़ तय की गई थी लेकिन इन्हें टाल दिया गया था. फ़लस्तीनी चुनाव से जुड़े कुछ अहम सवाल और उनके जवाब फ़लस्तीनी संसद चुनाव में फ़लस्तीनी संसद के लिए 132 सदस्य चुनने के लिए मतदान हो रहा है. संसद का कार्यकाल चार साल का होगा. संसद को फ़लस्तीनी वैधानिक परिषद भी कहा जाता है. राष्ट्रपति के अलावा, फ़लस्तीनी प्राधिकरण पर भी संसद का नियंत्रण है. चुनाव में मुख्य मुक़ाबला सत्ताधारी दल फ़तह और चरमपंथी संगठन हमास के बीच माना जा रहा है. 1996 में हुए चुनाव में हमास ने हिस्सा नहीं लिया था. फ़लस्तीनी संसद के लिए चुनाव कई बार टल चुका है. फ़लस्तीनी प्राधिकरण अब तक कहता आया है कि इसराइली कब्ज़े और सुरक्षा हालात के चलते चुनाव करवाना असंभव है. लेकिन इस बार फ़तह और हमास दोनों ने कहा है कि संसदीय चुनाव सुचारू रुप से संपन्न करवाने के लिए वे मिल कर काम करेंगे. वर्तमान में फ़लस्तीनी संसद में फ़तह की 49 सीटें हैं और 15 सीटों पर फ़तह से जुड़े निर्दलीय हैं. इसराइल हमास के चुनाव में हिस्सा लेने के ख़िलाफ़ क्यों? हमास सार्वजनिक तौर पर इसराइल को तबाह करने की बात कहता आया है और इसराइल के ख़िलाफ़ सैकड़ों हमलों में हमास का हाथ रहा है. पिछले साल स्थानीय चुनाव में हमास ने ज़बरदस्त जीत हासिल की थी. इसराइल को डर है कि हमास चुनाव जीत सकता है और वो हमास के चुनाव में हिस्सा लेने के ख़िलाफ़ रहा है. इसराइल ने कहा है कि फ़लस्तीनी संसदीय चुनावों में चरमपंथी संगठन हमास को पूर्वी यरुशलम में भाग लेने से रोकने की कोशिश की जाएगी. फ़लस्तीनी नेताओं ने इसराइली मंत्रिमंडल के इस फ़ैसले की आलोचना की है. पूर्वी यरुशलम में रहने वाले फ़लस्तीनी मत डाल सकेंगे? पूर्वी यरुशलम में रहने वाले फ़लस्तीनियों में से कुछ को ही यरुशलम में मतदान करने की इज़ाजत दी गई है. फ़लस्तीनी प्रशासन और इसराइल के बीच हुए समझौते के मुताबिक़ येरुशलम में रहने वाले 5.5 फ़ीसदी फ़लस्तीनियों को ही पूर्वी यरुशलम में वोट डालने दिया जाएगा. यानि सिर्फ़ 6300 फ़लस्तीनी ही येरुशलम में वोट डाल सकेंगे. चुनाव अधिकारी पूर्वी यरुशलम में जाकर लोगों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर टिकट बांटेंगे. जिन लोगों को टिकट मिलेगा उन्हें फिर पोस्ट ऑफ़िस भेजा जाएगा और बैलट पेपर यानि मतदान पत्र दिया जाएगा. इन मतदान पत्रों को बाद में फ़लस्तीनी चुनाव अधिकारियों के पास भेज दिया जाएगा. येरुशलम में कोई मतदान केंद्र नहीं होगा. यरुशलम में रहने वाले बाकी करीब एक लाख फ़लस्तीनी नागरिकों को यरुशलम की सीमा से बाहर जाकर वोट डालना होगा जहाँ उनके लिए विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए जाएँगे. वोट डालने के लिए उन्हें इसराइल के नाकों से होकर गुज़रना होगा. इसराइल ने कहा है कि वो नाकों पर लोगों के साथ नरमी बरतेगा. लेकिन इन मतदान केंद्रों तक पहुँचना आसान नहीं है और आशंका है कई लोग मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे. मतदान का ये तरीका फ़लस्तीनियों को ये कहने की इजाज़त देता है कि वे फ़लस्तीनी ज़मीन पर मतदान कर रहे हैं वहीं इसराइल ये कह सकता है कि पूर्वी यरुशलम में रहने वाले फ़लस्तीनी डाक के ज़रिए विदेशी ज़मीन से मतदान कर रहे हैं. यूरोपीय संघ की ओर से निगरानी कर रहे अधिकारियों के सूत्रों ने कहा है कि मतदान का ये तरीका कोई 'अच्छा' तरीका नहीं है पर ये ज़रुर है कि इससे पूर्वी यरुशलम में कुछ हद तक मतदान हो सकेगा. पूर्वी यरुशलम का इलाक़ा उन क्षेत्रों में से एक है जिसपर इसराइलियों ने 1967 की जंग में कब्ज़ा किया था. हमास के चुनाव में हिस्सा लेने के मायने चरमपंथी संगठन हमास के चुनावी प्रकिया में हिस्सा लेने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं और कई तरह की आशंकाएँ भी जताई गईं हैं. माना जा रहा है कि हमास चुनाव में एक तिहाई तक सीटें जीत सकता है जिसे लेकर इसराइल आशंकित है. लेकिन एक मत ये भी है कि राजनीतिक प्रकिया में शामिल होने से हमास का कट्टरवादी रवैया नरम हो सकता है. कितने अहम हैं ये चुनाव? ये चुनाव फ़लस्तीनी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रकिया के लिए बेहद ज़रूरी हैं और चुनाव के बाद इसराइल के साथ रुकी हुई शांति प्रकिया फिर से शुरू हो सकती है. इस चुनाव में अगर देरी होती है, हिंसा या फिर धांधली होती है तो ये फ़लस्तीनियों के लिए बेहद निराशाजनक होगा. फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और इसराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुद ओलमार्ट दोनों ने कहा है कि फ़लस्तीनी चुनाव नतीजे आने के बाद और मार्च में इसराइल में चुनाव होने के बाद वे शांति प्रकिया फिर शुरु करने के लिए तैयार हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'फ़लस्तीनी चुनाव निर्धारित समय पर हों'04 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना इसराइल ने चुनाव प्रचार रोका03 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना संसदीय चुनावों में देरी न करें: हमास22 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना चुनाव से पहले फ़तह पार्टी में फूट15 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना 'संघर्षविराम आगे नहीं बढ़ाया जाएगा'09 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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