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गुरुवार, 01 दिसंबर, 2005 को 18:05 GMT तक के समाचार
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नेताओं का नेता- कौन है 'द लीडर'?
स्कूली क़िताब का पन्ना
"द लीडर" से उठे विवाद से पाकिस्तान सरकार पशोपेश में है
पाकिस्तान की ग्यारहवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों में एक कविता पढ़ाई जा रही है. नाम है– “द लीडर.”

कौन है ये लीडर– ये नेता?

अंग्रेज़ी में लिखी गई 20 पंक्तियों की इस कविता के पहले अक्षरों को एक साथ लिखा जाए तो अंग्रेज़ी में पूरा नाम बनता है– प्रेसिडेंट जॉर्ज डबल्यू बुश!

यानि “पी” से बनेगा “पेशेंट” यानि धैर्यवान, “आर” से “रेडी टू मीट एवरी चैलेंज” यानि हर चुनौती से लड़ने के लिए तत्पर, “ई” से “ईज़ी इन मैनर” और “एस” – “स्ट्रॉन्ग इन फ़ेथ”.

फिर “आई”, “डी”, “ई”, “एन” और “टी” से “टेल्ज़ इट स्ट्रेट”– दो टूक बात करने वाला. इस तरह बनता है प्रेसिडेंट.....और पूरा नाम बनता है प्रेसिडेंट जॉर्ज डबल्यू बुश.

खंडन

लेकिन पाकिस्तान के नेशनल बुक ट्रस्ट के सचिव असलम राव से बीबीसी ने बात की तो उनका कहना था कि ये कविता अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की प्रशंसा में नहीं लिखी गई है.

“ ये कविता किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं लिखी गई है – ये तो सिर्फ़ एक संयोग है कि कविता के पहले अल्फ़ाज़ बनाएँ तो किसी का नाम बनता है. कविता में तो किसी भी नेता के गुण हैं जो किसी के भी हो सकते हैं, इस कविता का वास्ता किसी एक शख़्सियत से नहीं है.”

कविता - द लीडर
ग्यारहवीं कक्षा की अंग्रेज़ी की किताब के पेज नंबर 216 पर है कविता
पाकिस्तान के शिक्षा मंत्रालय ने इस क़िताब को पढ़ाने की बाक़ायदा मंज़ूरी दी है और दबी ज़ुबान से वहाँ के अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर मानते हैं कि इस कविता में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डबल्यू बुश की शान में कसीदे पढ़े गए हैं.

तो पाकिस्तान में बच्चे क्या पढ़ रहे हैं ग्यारहवीं कक्षा में?

अगर आख़िरी पाँच पंक्तियों का अनुवाद किया जाए तो कुछ इस तरह का बनता है...आप भी पढ़िए -

“दुनिया को अपने अटल इरादों में लाने को तत्पर,
शांति की कामना लिए युद्ध को तत्पर,
बुराई के विनाश के हित, सामर्थ्य को लड़ाता,
विश्वास का भाजन और नेताओं का नेता,
है ये वो इंसान जो करता है अपना कर्तव्य.”

पाकिस्तान में पिछले तीन साल में पाठ्यक्रम और स्कूली शिक्षा पर पुनर्विचार हो रहा है और कुछ बदलाव लाए भी गए हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी कहते रहे हैं कि स्कूल में ऐसी चीज़ें पढ़ाई जानी चाहिए जिससे उनका फ़ायदा हो और वे दुनिया की सच्चाई से वाक़िफ़ भी हों.

लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि ये कविता ऐसे किसी निर्देश के अंतर्गत पढ़ाई जा रही है या नहीं.

पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री फ़िलहाल देश से बाहर हैं और उनके लौटने पर वे ही शायद इस विवाद पर कुछ रोशनी डाल पाएँ.

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