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बुधवार, 02 नवंबर, 2005 को 08:55 GMT तक के समाचार
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कई ईरानी राजदूत वापस बुलाए गए
महमूद अहमदीनेजाद
अहमदीनेजाद को परंपरावादी माना जाता है
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने यूरोप के कई देशों में अपने राजदूत बदलने का फ़ैसला किया है और इसके लिए उन्होंने कई राजदूतों को वापिस आने के लिए कहा गया है.

लंदन में ईरानी राजदूत मोहम्मद हुसैन अदेली ने बताया है कि उन्हें उनका कार्यकाल समाप्त होने से दो साल पहले ही वापिस बुलाया जा रहा है.

अदेली अमरीका शिक्षित हैं और उन्हें 2004 में ही लंदन में ईरान का राजदूत बनाया गया था.

ऐसी भी ख़बरें हैं कि फ्रांस, जर्मनी, कुछ अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूतों को भी बदला जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजदूतों की इस फेरबदल को इस बात का संकेत माना जा सकता है कि राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अपने देश के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर विदेशों में कुछ अलग नीति लेकर चलना चाहते हैं.

जिन राजदूतों को हटाया जा रहा है वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे पर बातचीत में शामिल रहे हैं और वे पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी के शासनकाल में भी रहे हैं.

महमूद अहमदीनेजाद जून में राष्ट्रपति बने थे और उन्होंने हाल के सप्ताह में जो बयान दिए हैं उनसे ख़ासा विवाद खड़ा हो गया था.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण में अहमदीनेजाद ने देशों से कहा था कि वे ईरान के अंदरूनी मामलों से दूर रहें और इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में एक संदेश समझा गया था.

मोहम्मद हुसैन अदेली
अदेली को 2004 में ब्रिटेन में राजदूत बनाया गया था

पिछले सप्ताह ही उन्होंने इसराइल के बारे में यह कह दिया था कि उसे दुनिया के नक्शे से मिटा देना चाहिए जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

परमाणु मुद्दा

ईरान का परमाणु कार्यक्रम हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बहस का मुद्दा रहा है. अमरीका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरान इन आरोपों का खंडन करते हुए कहता है कि वह परमाणु कार्यक्रम असैनिक उद्देश्यों यानी ऊर्जा के लिए चलाना चाहता है.

जब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय राय के ख़िलाफ़ यूरेनियम का संवर्धन फिर से शुरू कर दिया था तो इससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर चल रही अंतरराष्ट्रीय बातचीत टूट गई थी.

अहमदीनेजाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेपरवाही वाली भाषा का इस्तेमाल किया है और देश के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर ज़ोर देते रहे हैं.

अहमदीनेजाद के रुख़ की वजह से उन्हें पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी से काफ़ी अलग समझा जाने लगा है. ख़ातमी को उदारवादी नेता माना जाता था.

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