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'चीन सैन्य ख़र्चे के बारे में पारदर्शी बने' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने चीन से अनुरोध किया है कि वह अपने सैन्य ख़र्चे के बारे में और पारदर्शिता दिखाए. बीजिंग पहुँचे रम्सफ़ेल्ड ने कहा कि चीन के गोपनीय तरीके से सैन्य क्षेत्र के विस्तार से अन्य देशों को उसके इरादों के बारे में संदेह होने लगा है. महत्वपूर्ण है कि चीन ने इस बीच पहली बार लोकतंत्र और राजनीतिक सुधारों पर 'श्वेत पत्र' जारी किया है. 'राजनीतिक पारदर्शिता' उनका कहना था कि सैन्य मामलों में पारदर्शिता अंत में राजनीतिक पारदर्शिता से संबंधित है. उधर चीन का कहना है कि वह लगातार समय-समय पर अपनी सेनाओं की संख्या और स्थिति के बारे में रिपोर्टें छापता है. चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उम्मीद की जा रही है कि रक्षा मंत्री रम्सफ़ेल्ड की यात्रा के बाद वे चीनी नीति को बेहतर समझ पाएँगे.
रम्सफ़ेल्ड बुधवार को चीनी राष्ट्रपति हु जिंताओ से मिलेंगे और बैठक के दौरान ताईवान, उत्तर कोरिया, अमरीका-चीन रक्षा रिश्तों के बारे में चर्चा होने की संभावना है. लोकतंत्र पर श्वेत पत्र चीन ने लोकतंत्र और राजनीतिक सुधारों पर 74 पन्ने का श्वेत पत्र जारी किया है. उसमें ये बताया गया है कि चीनी लोगों के लिए कम्युनिस्ट शासन क्यों बेहतर है. श्वेत पत्र में ये भी दावा किया गया है कि चीन में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व ही सबसे पुख़ता गारंटी है. चीनी राजनीतिक नेतृत्व के आलोचकों का कहना है कि चीन की आर्थिक शक्ति के साथ-साथ वहाँ राजनीतिक सुधार भी होने चाहिए. श्वेत पत्र में ये भी कहा गया है कि आर्थिक विकास के लिए सामाजकि स्थिरता बहुत ज़रूरी है. |
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