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बाली फिर से क्यों दहला? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशियाई द्वीप बाली में शनिवार को बम धमाकों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई जबकि 90 अन्य घायल हो गए. ये बम उनसे काफ़ी छोटे बताए जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल तीन साल पहले हुए धमाकों के लिए किया गया था, जिसने बाली के पर्यटन उद्योग को मानो हिला कर रख दिया था. इस बार हताहतों की संख्या पिछली बार की तरह नहीं है और वहाँ के दो अस्पताल इलाज के लिए समर्थ हैं लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने गंभीर चोटों का ज़िक्र किया है. ज़ाहिर है बाली पिछले धमाकों से अभी बस उबर ही रहा था, पर्यटकों को वापस खींचने में जुटा था कि ये ताज़ा धमाके हो गए. 2002 के धमाकों के बाद होटलों में सुरक्षा व्यवस्था को बहुत मज़बूत किया गया था, लेकिन उन सैंकड़ो दुकानों का क्या किया जा सकता है जो बाली के दक्षिणी तट पर हैं. पिछले तीन वर्षों में इंडोनेशिया सरकार ने अनेक चरमपंथियों को पकड़ा है जिन पर बम कांड में शामिल होने के आरोप थे. लेकिन जमा इस्लामिया को पुरी तरह से ख़त्म कर पाने में सफलता नहीं मिली है. माना जाता है कि यही वो संगठन है जिसने दक्षिण पूर्वी एशिया में कई गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण दिया है. जॉन टेलर लंदन स्थित साउथ बैंक विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर हैं और इंडोनिशिया पर ख़ासी नज़र भी रखते हैं. उन्हें इस हमले पर ज़रा भी आश्चर्य नहीं था. जॉन टेलर का कहना था, "मेरी नज़र में ऐसा होने की तो एक लंबे समय से आशंका थी. जमा इस्लामिया अब भी सक्रिय है और उन्होंने कहा है कि वे रमज़ान के दौरान लगातार हमले करेंगे और फिर बाली जैसी जगह तो निशाने पर हो ही सकती है." अभी पिछले महीने ही इंडोनिशिया के राष्ट्रपति ने इस तरह के हमले की आशंका व्यक्त की थी. लेकिन ये चेतावनी भी इस हमले को रोकने में कामयाब नहीं रही. |
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