|
ग्यारह सितंबर के हमलावरों को सज़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्पेन की अदालत ने एक सीरियाई मूल के व्यक्ति को ग्यारह सितंबर के हमलों के सिलसिले में 27 वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई है. इमाद यारकस पर आरोप है कि वे स्पेन में अल क़ायदा के प्रमुख थे. यारकस के अलावा 17 अन्य लोगों को अल क़ायदा की मदद करने का दोषी पाया गया है. अल क़ायदा की मदद करने के आरोप में जिन लोगों को सज़ा हुई है उनमें अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा के एक पत्रकार भी शामिल हैं. तासीर अलूनी नाम के इस पत्रकार को साज़िश में शामिल होने के आरोप में सात वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई गई है. आतंकवाद से संबंधित यूरोप के अब तक के इस सबसे बड़े मुक़दमे में दोषी पाए गए लोगों को छह वर्ष से लेकर ग्यारह वर्ष तक की सज़ा सुनाई गई है, लेकिन यारकस को हत्या का दोषी पाया गया है इसलिए उन्हें 27 वर्ष की सज़ा दी गई है. इनमें से ज्यादातर अभियुक्तों को अमरीका में ग्यारह सितंबर 2001 को मारे गए सभी तीन हज़ार लोगों की मौत के ज़िम्मेदार ठहराया गया था लेकिन अदालत ने सिर्फ़ यारकस को हत्या का दोषी माना. यूरोपीय देशों में मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है इसलिए सरकारी वकीलों ने माँग की थी कि दोषियों को अधिकतम सज़ा दी जाए. निराशा मैड्रिड से बीबीसी के संवाददाता डैनी वुड का कहना है कि स्पेन के सरकारी वकील इस फ़ैसले के निराश ही होंगे क्योंकि वे चाहते थे कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले जो क़ानूनी दृष्टि से एक नज़ीर बन जाए. स्पेन में रेल बम धमाकों के मामले में अगले वर्ष फ़ैसला होना है और सरकारी वकील चिंतित हैं कि इस फ़ैसले का असर उस मुक़दमे पर पड़ सकता है. 42 वर्षीय यारकस पर आरोप है कि ग्यारह सितंबर के हमलावरों को उन्होंने हमले के लिए तैयार किया और उन्हें मदद दी. यारकस ने इस पूरे मुक़दमे को एक मज़ाक करार दिया है और कहा है कि उन्हें ओसामा बिन लादेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मुक़दमे का फ़ैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि इस सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए जिनसे पता चला कि स्पेन अल क़ायदा का एक बहुत अहम ठिकाना था. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||