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अमरीकी सांसद भारत के रुख़ से नाराज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के एक वरिष्ठ सांसद ने परमाणु मुद्दे पर ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका के कड़े रूख़ का समर्थन नहीं करने के लिए भारत की आलोचना की है. डेमोक्रेट सांसद टॉम लैंटोस ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वह भारत और अमरीका के बीच नए संबंधों के समर्थक हैं लेकिन ईरान परमाणु मामले पर भारतीय रुख़ से वे नाख़ुश हैं. अमरीकी संसद की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रमुख सदस्य लैंटोस ने कहा, "मुझे ईरान के मामले को सुरक्षा परिषद में ले जाने में भारत की अनिच्छा पर आपत्ति है." उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए तैयार करने में ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी का संयुक्त प्रयास नाकाम रहा है. लैंटोस ने कहा है कि भारत को अमरीकी चिंताओं का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में परमाणु कार्यक्रम में सहायता के लिए दोनों देशों ने जुलाई में जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे उसे कार्यान्वित करने के लिए अमरीकी क़ानून में बदलाव की ज़रूरत पड़ेगी. उल्लेखनीय है कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के लिए गैस पाइपलाइन की एक बड़ी परियोजना पर काम करना चाहता है जिसमें ईरान और पाकिस्तान की भी साझेदारी होगी. रिपोर्टों के अनुसार भारतीय अधिकारियों ने ईरान मामले को सुरक्षा परिषद में भेजने की कार्रवाई का समर्थन नहीं करने की बात की है. ईरान से पाइपलाइन के ज़रिए गैस लाने की भारत की योजना से भी अमरीका ख़ुश नहीं है, इस योजना को लेकर अमरीका सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएँ प्रकट कर चुका है. |
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