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'गैस पाइपलाइन बहुत अहम है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच गैस पाइप लाइन बहुत महत्वपूर्ण है और यह सिर्फ़ दोनों देशों के बीच का मामला है किसी अन्य देश का नहीं. अपनी अमरीका यात्रा की समापन पर बुधवार को प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमरीका भी इस बात को समझता है. ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भारत की यात्रा के दौरान भारत-ईरान गैस पाइप लाइन पर कुछ ऐतराज़ जताया था. प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादी तत्वों पर नियंत्रण को किसी भी देश के साथ बातचीत की एक शर्त बनाया जाना चाहिए और अमरीका भी इस विचार से सहमत है और उसने आतंकवाद से संबंधित भारत की चुनौतियों को भी समझा है. ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने अमरीका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बुश से मुलाक़ात की है और मंगलवार को अमरीकी संसद को भी संबोधित किया. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए. जी4 और अफ्रीकी संघ उधर भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए माहौल बनाने के लिए बने चार देशों के संगठन ज-4 और अफ्रीकी संघ के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है. वाशिंगटन में पत्रकार सम्मेलन में नटवर सिंह ने कहा कि अब अफ्रीकी संघ के देश भी इस पर सहमत हो गए हैं कि नए सदस्यों को भी वीटो का अधिकार होना चाहिए. पहले वे वीटो के अधिकार की हिमायत नहीं कर रहे थे जबकि जी4 की माँग है कि नए देशों को वीटा का भी अधिकार होना चाहिए. ग़ौरतलब है कि भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. नटवर सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर अफ्रीकी संघ से बातचीत जारी रहेगी. |
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