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अख़बारों के निशाने पर बुश प्रशासन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के दक्षिणी राज्यों में कैटरीना समुद्री तूफान की मार से बौखलाये बुश प्रशासन को दुनिया भर के अख़बारों में आलोचनाओं का निशाना बनना पड़ा है. ईश्वर भी बख़्शा नहीं गया... ये सुर्ख़ी है स्पेन के अख़बार एल रासोन की. राजा भी नंगा हुआ... ये कहना है फ्रांस के ले प्रोग्रे का. पाकिस्तान के दि नेशन अख़बार ने कैटरीना से जूझ पाने में प्रशासन की नाकामी को तो उजागर किया ही, साथ ही तूफान से प्रभावित उन लोगों की आशाओं और मोहभंग को भी रेखांकित किया है, जो ये मानकर चल रहे थे कि तूफान के आने की आहट भर से ही सरकार प्रभावित इलाकों में जहाज़ों नौकाओं और हेलिकॉप्टरों का जाल बिछा देगी. अख़बार ने अमरीकी सरकार की नाकामी पर सीधे उँगली उठाते हुए कहा है कि तीन दिन तक लोग भूखे प्यासे तड़पते रहे और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही. पोलैंड के जैस्पोस्पोलिता अख़बार में कैटरीना से हुई तबाही के बारे में जहां एक कॉलम लेखक ने ये लिखा कि प्रकृति के प्रकोप के आगे दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति भी बेबस, वहीं इसी अख़बार के दूसरे संवाददाता ने इस संकट से निबट पाने में सरकार की कोताही और अमरीकी समाज के खोखलेपन की परतें खोली हैं. ईरान के कैहन अख़बार के एक कॉलम लेखक ने अमरीका की आधुनिकता पर करारी चोट करते हुये कहा है कि आधुनिक बनने के लिए बहुत कुछ अनदेखा करना पड़ता है, ये भी भूल जाना पड़ता है कि हम इंसान हैं. ईरान के ही सियासते रूज़ का कहना है कि कैटरीना ने ये साबित कर दिया है कि अमरीका जब अपनी आंतरिक समस्याओं से नहीं निबट सकता तो दुनिया भर में शांति और लोकतंत्र की स्थापना वो कैसे कर सकता है. इंडोनेशिया के मीडिया इंडोनेशिया ने तो कैटरीना से जूझ पाने में अमरीकी प्रशासन की बेबसी को निशाना बना कर निर्णायक वक्तव्य ही दे डाला, ये कहते हुए कि हरीकेन कैटरीना ने अमरीकी ग़ुरूर को कहीं तोड़ डाला है. |
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