| मिस्र की सैरगाह शर्म अल-शेख़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यह पहली बार है कि शर्म अल-शेख़ और नामा खाड़ी पर बम हमले हुए हैं. सिनाई प्रायद्वीप के दक्षिणी कोने में स्थित यह छुट्टियाँ मनाने की जगह यूरोपीय और मिस्र के पर्यटकों में काफ़ी लोकप्रिय है. वहाँ बहुत से अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हो चुके हैं और इस साल के शुरूआत में इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं के बीच वहाँ बैठक भी हुई थी. सिनाई के दूसरे छोर पर, इसराइल से लगी सीमा पर, पिछले साल हुए धमाकों के बावजूद शर्म अल-शेख़ को सुरक्षित माना जाता रहा है. उस हमले में 34 इसराइली पर्यटक मारे गए थे. मिस्र के पर्यटन उद्योग को निशाना बनाते हुए हमले पहले भी हो चुके हैं. इस साल अप्रैल में काहिरा के एक बाज़ार में एक अमरीकी और दो फ्रासीसी लोग मारे गए थे. 1997 में बदूँकधारियों ने लक्सर के प्राचीन मंदिर के क़रीब 59 पर्यटकों को निशाना बनाया था.
शर्म अल-शेख़ पर हुआ ताज़ा हमला पिछले एक दशक का सबसे बड़ा हमला है. ख़ुद को अब्दुल्ला अज़्ज़म ब्रिगेड या कभी अल-क़ायदा कहने वाले एक संगठन ने हाल के इन सभी हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी. लेकिन इसकी कभी पुष्टि नहीं हो सकी है. ताज़ा हमलों के बारे में मिस्र के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय का कहना है कि फ़िलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती कि ताज़ा धमाकों में अल-क़ायदा का हाथ है या नहीं. मिस्र के कुछ जानकारों ने चिंता व्यक्त की है कि ये हमले मिस्र में हिंसक इस्लामी चरमपंथ के दोबारा सक्रिया होने या और कुछ नहीं तो मिस्र के पर्यटन उद्योग को वास्तविक ख़तरा पैदा होने के संकेत हैं. |
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