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ग़ज़ा योजना टालने का प्रस्ताव नामंज़ूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली संसद ने ग़ज़ा से यहूदी बस्तियाँ हटाने की योजना को स्थगित करने के लिए पेश किए गए तीन प्रस्तावों को नामंज़ूर कर दिया है. यहूदी बस्तियाँ हटाने का काम अगस्त में शुरू होने वाला है. संसद में इन प्रस्तावों पर बुधवार को मतदान हुआ. मतदान में ये तीनों प्रस्ताव गिर गए. इन प्रस्तावों पर बहस के दौरान इसराइली संसद नेसेट में काफ़ी शोरग़ुल हुआ. इसराइल की न्याय मंत्री सिपी लिवनी ने गज़ा से यहूदी बस्तियाँ हटाने जाने के सरकार के फ़ैसले की हिमायत की. उनके भाषण के दौरान काफ़ी टोका-टाकी हुई. ग़ज़ा योजना का विरोध करने वालों ने कई बार विरोध में बोलने की कोशिश भी की. ग़ज़ा योजना में देरी के लिए पेश तीन अलग-अलग प्रस्तावों में कहा गया था कि ग़ज़ा में अभी ये स्थिति नहीं है कि लोगों को मानवीय तरीक़े से हटाया जा सके. लेकिन न्याय मंत्री का कहना था कि ये प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद ग़ज़ा योजना को टालना नहीं बल्कि उसे रद्द कराना चाहते हैं. उन्होंने उन लोगों से भी अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की जो ग़ज़ा से बस्ती हटाए जाने के ख़िलाफ़ विरोध मार्च करते हुए ग़ज़ा की ओर प्रस्थान कर गए हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे ग़ज़ा न जाएँ. प्रदर्शनकारी ग़ज़ा न पहुँच पाएँ- इसके लिए वहाँ व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. |
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