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प्रदर्शनकारी अड़े, इसराइली पुलिस सतर्क | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गज़ा से यहूदी बस्तियाँ हटाने की योजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के रुख़ को देखते हुए इसराइल ने पुलिस को सतर्क कर दिया है. इस योजना के विरोध हज़ारों की संख्या में यहूदी सड़कों पर उतर आए हैं. इसराइल ने यहाँ रैली पर पाबंदी लगा रखी है लेकिन लोग उसका विरोध कर रहे हैं. सोमवार को शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने रोकने की तमाम कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे जारी रखने की बात कही है. प्रदर्शनकारियों को गज़ा में घुसने से रोकने के लिए क़रीब 20 हज़ार पुलिसकर्मी वहाँ मौजूद हैं. सोमवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई. लेकिन बाद में प्रदर्शनकारी रात भर के लिए अपना विरोध मार्च रोकने पर राज़ी हो गए. इसराइल ने इस विरोध प्रदर्शन को ग़ैर क़ानूनी ठहराया है लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तीन दिनों का विरोध मार्च जारी रखेंगे. बातचीत रात में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत चलती रही. अधिकारियों का कहना है कि वे प्रदर्शनकारियों को गज़ा में घुसने की अनुमति नहीं देंगे.
इसराइल के उप प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट का कहना है कि अगर प्रदर्शनकारी पाबंदी का विरोध करते हैं, तो किसी भी समस्या के लिए वही ज़िम्मेदार होंगे. उन्होंने कहा कि गज़ा से 21 यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना को संसद ने मंज़ूर किया है और प्रदर्शनकारी इसराइली सरकार के इस वैधानिक फ़ैसले में हस्तक्षेप कर रहे हैं. गुरुवार रात से ही इसराइली सेना ने गज़ा में नहीं रहने वाले इसराइली लोगों के लिए वहाँ आने-जाने पर पाबंदी लगा दी थी. यरूशलम स्थित बीबीसी संवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़प हुई और कुल मिलाकर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा. उनका कहना है कि इसराइली सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि गज़ा में पहले से ही रह रहे क़रीब साढ़े आठ हज़ार यहूदी लोगों के साथ और लोग शामिल न हो जाए और अगर ऐसा हुआ तो गज़ा से वापसी में और भी समस्याएँ आएँगी. |
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