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इराक़ी मुआवज़ा रद्द करने की मांग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि 1990 की शुरुआत में इराक़ के कुवैत पर कब्ज़े और पहले खाड़ी युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए इराक़ से लिए जा रहे मुआवज़े को अब बंद किया जाए. इराक़ को संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के तहत मुआवज़े के रूप में युद्ध से प्रभावित कुवैत के लोगों और खाड़ी के अन्य देशों को हर महीने नौ करोड़ डॉलर देने पड़ते हैं. इराक़ के उप विदेशमंत्रि मोहम्मद हमुद बिदन ने संयुक्त राष्ट्र के मुआवज़े संबंधी आयोग की एक महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत में कहा है कि यह मुआवज़ा बंद किया जाए और इसका इस्तेमाल इराक़ के पुनर्निर्माण में किया जाए. इराक़ी दलील इराक़ी मुआवज़े का जहां तक ताल्लुक है, इराक़ी उपविदेशमंत्री की दलील इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्यों कि यह मुआवज़े आम लोगों के साथ साथ ज्यादातर ऐसे देशों को दिए जा रहे हैं जो इराक़ से कही ज़्यादा धनी हैं. इराक़ द्वारा 1991 से दिए जा रहे मुआवज़े का वितरण संयुक्त राष्ट्र के मुआवज़े संबंधी आयोग के ज़रिए होता है. आयोग कि इस सप्ताह होने वाली बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यों कि इसमें तय होना है कि इराक़ को कुल कितना मुआवज़ा देना होगा. संयुक्त राष्ट्र पहले ही इराक़ से 52 अरब डॉलर का मुआवजा देने का कह चुका है मगर समझा जाता है कि मुआवज़े के सारे दावों को देखने के बाद इस रक़म मे कुछ और वृद्धि होगी. सद्दाम हुसैन के शासन काल के दौरान इराक़ पर पहले ही लगभग 100 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज़ है और इसके साथ मुआवज़ा चुकाना उसके लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है. |
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