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शनिवार, 11 जून, 2005 को 01:30 GMT तक के समाचार
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विकसित देशों में कर्ज़ राहत पर सहमति
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ब्राउन ने सहमति की उम्मीद जगाई
दुनिया के सबसे धनी देशों के वित्त मंत्रियों में ग़रीब देशों को कर्ज़ में राहत देने के मुद्दे पर सहमति हो गई है. जिन देशों की कर्ज़ माफ़ी पर विचार चल रहा था उनमें अधिकतर अफ़्रीकी देश हैं.

ठीक एक महीने बाद ही स्कॉटलैंड में ग्रुप-8 देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है.

ब्रिटेन ने वादा किया है कि इस सम्मेलन में ग़रीबी कम करने का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा.

ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि इस समझौते के तहत विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाएं की ओर बकाया क़रीब पचपन अरब डॉलर की रक़म की भरपाई हो पाएगी.

लेकिन इस योजना को लागू करने के लिए इन संस्थाओं के सदस्य देशों की सहमति भी ज़रूरी होगी.

इस समझौते के बारे में गॉर्डन ब्राउन ने कहा "हम नहीं चाहते कि कर्ज़ अदा न किये जानी की पुनरावृति हो.हमने विश्व बैंक और आईएमएफ से भी कहा है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक रिपोर्ट बनाए..इससे ये भरोसा रहेगा कि पैसे का उपयोग गरीबी उन्मूलन के लिए हो रहा है. "

ब्रिटन में इथियोपिया के राजदूत फीसेहा अडूगना का भी मानना है कि कर्ज़ मुआफ़ी मिलने से बहुत फर्क़ पड़ेगा.

उन्होंने कहा "सरकार कई तरह के सुधार कर रही है,हम सही नीतियां अपना रहे हैं.लेकिन आर्थिक विकास के रास्ते में भारी कर्ज़ समेत कई बाधाएं हैं.इस तरह से देखे जाए तो अगर ईथोपिया और कई अफ्रीकी देशों का कर्ज़ पूरी तरह से माफ़ कर दिया जाता है .तो इसमें कोई शक़ नहीं कि ये उनके लिए बेहद फ़ायदेमंद होगा."

कर्ज़ माफ़ी देने के लिए आईएमएफ और विश्व बैंक की योजना के आधार पर ही ये नई योजना बनाई गई है.

गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि जो अठारह देश अंतराष्ट्रीय संस्थाओं की योजनाओं पर खरे उतरे हैं उन्हें कर्ज़ माफ़ी के फ़ैसले के तहत सबसे जल्दी राहत मिलेगी.

उन्होंने कहा कि नौ और देश भी अगले एक डेढ़ साल के अंदर राहत पाने के हक़दार हो जाएंगे.इसके अलावा अगर कुछ और देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा मंज़ूर किये गए आर्थिक कार्यक्रम और गरीबी उन्मूलन योजना पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं ,तो उन्हें भी कर्ज़ माफ़ी मिल सकती है.

ये वो देश हैं जो इन सुधारों को लिए तैयार तो हो गये हैं लेकिन आंतिरक विवादों जैसी समस्य़ाओं के चलते उन्हें लागू नहीं कर पाए हैं.

कर्ज़ माफी के लिये काम कर रही संस्थाओं ने इस समझौते को सही दिशा में उठाआ गया कदम बताया है. लेकिन उनकी कुछ आपत्तियों भी हैं.

एक्शनएड संस्था की रोमिले ग्रीनहिल ने कहा है कि इस योजना के लिए और पैसे की ज़रुरत है "ये अच्छी बात की 18 गरीब देशों को राहत मिल रही है लेकिन ज्यादा मदद देने की बात पर कुछ नहीं कहा गया है."

संस्थाओं का कहना है कि इस समझौते का दायरा बढ़ाते हुए इसमें और विकासशील देशों को शामिल किया जाना चाहिए.साथ ही कई संस्थाओं ने इस बात की आलोचना कि है कि कर्ज़ में छूट लेने के लिए गरीब देशों को आईएमएफ की नीतियां अपनानी पड़ेंगी.

अमरीकी रज़ामंदी

इस बीच अमरीका और ब्रिटेन इन देशों पर विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी एजेंसियों के कर्ज़ को पूरी तरह माफ़ करने के एक प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं.

वाशिंगटन में अमरीकी अधिकारियों ने इस बात की घोषणा की है. अब इन दोनों देशों को उम्मीद है कि वे इस मुद्दे पर जी-8 देशों का समर्थन हासिल कर सकेंगे.

जी-8 में ब्रिटेन और अमरीका के अलावा इटली, जर्मनी, रूस, फ़्रांस, कनाडा और जापान शामिल हैं.

संगठन के अधिकतर देशों के वित्त मंत्रियों ने निर्धनतम देशों को कर्ज़ राहत के बारे में कोई समझौता होने की उम्मीद व्यक्त की थी.

हालाँकि जर्मन वित्त मंत्री हाँस आइकल ने कहा है कि अगले महीने स्कॉटलैंड में होने वाले जी-8 शिखर सम्मेलन से पहले समझौते की संभावना कम ही हैं.

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